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खंडपीठ को लेकर कठेरिया के खिलाफ खुलकर सामने आए बाबूलाल

Sun, 18 Jan 2015 02:05 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
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शनिवार को खंडपीठ आंदोलन के समर्थन में कठेरिया के समर्थन पत्र पर तंज कसते हुए उन्हीं की पार्टी के सांसद चौधरी बाबूलाल ने उनकी भूमिका पर प्रश्नचिन्ह लगाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि चलो देर आए, दुरुस्त आए। क्योंकि इससे पहले दो बार खंडपीठ के समर्थन संबंधी पत्र पर दस्तखत करने में टालमटोल कर चुके हैं।
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बता दें कि प्रो. रामशंकर कठेरिया और फतेहपुर सीकरी के सांसद चौधरी बाबूलाल के बीच काफी दिनों से शीतयुद्ध चला आ रहा है। शनिवार को महापंचायत के मंच से बाबूलाल ने अधिवक्ताओं को अपना समर्थन देने के बाद कठेरिया के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पहले तो उन्होंने महापंचायत में प्रतिनिधि के माध्यम से अपना समर्थन पत्र भिजवाने पर कठेरिया का स्वागत किया। इसके बाद उन पर तंज कसते हुए कहा, देर आए, दुरुस्त आए। फिर बताया कि कि मैने पूर्व में उनसे समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर करने को कहा था, जिसे उन्होंने यह कहते हुए टाल दिया कि वह राज्यसभा में जा रहे हैं। अधिवक्ताओं के जंतरमंतर पर धरना से एक दिन पहले भी हस्ताक्षर कराने गए थे, तब भी उन्होंने ‘देखते हैं’ कहकर बात टाल दी। हालांकि यह सब बोलने के पहले उन्होंने मंच पर मौजूद पार्टी पदाधिकारियों से अनुरोध किया कि वह उनकी बात का गलत मतलब न निकालें।

दरअसल, दोनों सांसदों के बीच पनप रहे मतभेद खुलने की शुरुआत पिछले दिनों दीवानी में आयोजित सभा के दौरान कठेरिया के उस बयान से हुई जिसमें कठेरिया ने बिना नाम लिए अपने ही एक नेता पर छपवाने की नियत से गलत बयानबाजी का आरोप लगाया था। इसके जवाब में चौधरी बाबूलाल महापंचायत के दौरान कठेरिया के खिलाफ खुलकर सामने आ गए। इस बीच उन्होंने अधिवक्ताओं के बीच सफाई देते हुए कहा कि मुझे अखबारों में छपने का शौक नहीं है, मुझ पर जितने भी मुकदमे लगे हैं, वह सब जनांदोलन को लेकर हैं।
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भारी न पड़ जाए बयानबाजी
खंडपीठ को लेकर केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. रामशंकर कठेरिया भी अपने ही सरकार के मंत्रियों के खिलाफ बयानबाजी कर चुके हैं। अब सांसद चौधरी बाबूलाल ने भी इस मुद्दे को लेकर कठेरिया के खिलाफ खड़े हो गए हैं। ऐसे में इस मुद्दे को लेकर मोदी सरकार के सांसदों द्वारा की जा रही बयानबाजी किसी पर भारी न पड़ जाए।
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