आगरा के मंटोला स्थित कैंथ वाली मस्जिद में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद अहमदाबाद में दहेज उत्पीड़न से तंग आकर खुदकुशी करने वाली महिला आयशा की मगफिरत (आत्मा की शांति) के लिए दुआ मांगी गई। इसके बाद ऑल इंडिया जमीतुल कुरैश की बैठक में फैसला किया गया कि मुस्लिम समाज के लोग निकाह में किसी तरह का दहेज न लेंगे और न ही देंगे। इसकी बाबत मुस्लिम इलाकों में जागरूकता के लिए परचे बंटवाए जाएंगे।
मस्जिद के इमाम याहिया खान ने दुआ के बाद कहा कि इस्लाम में दहेज लेने की मनाही है। इसके बाद भी गुजरात के अहमदाबाद की आयशा खान की मृत्यु से समाज के लोगों को सबक लेना चाहिए। जमीतुल कुरैश के जिलाध्यक्ष मोहम्मद शरीफ काले ने कहा कि आयशा की खुदकुशी के बाद समाज में जागरूकता लानी होगी। अब किसी भी निकाह में दहेज नहीं लें।
हिंदुस्तानी बिरादरी के अध्यक्ष डॉ. सिराज कुरैशी ने कहा कि आयशा केस से हर मुस्लिम को सबक लेना होगा। अदनान कुरैशी ने कहा कि नौजवानों को समाज में फैली इस कुप्रथा को खत्म करने के लिए आगे आना होगा। भारतीय मुस्लिम विकास परिषद के अध्यक्ष समी आगाई ने बताया कि मुस्लिम समाज में दहेज लेने और देने पर रोक लगाने के लिए परचे बंटवाए जा रहे हैं।