जिले की बाह तहसील में 27 अगस्त, 1942 को लीलाधर उर्फ ककुआ ने जनता के सामने उत्तेजक भाषण देते हुए अंग्रेजी हुकूमत का जंगल कानून तोड़ने का आह्वान किया। इसके बाद 500 लोगों ने वन विभाग के दफ्तर में तोड़फोड़ कर दी थी। कर्मचारियों के क्वार्टर ढहा दिए थे। बिचकोली में सरकारी दफ्तर को आग लगा दी थी।
इन घटनाओं के तुरंत बाद गिरफ्तारियां शुरू हो गई। लीलाधर, अटल बिहारी वाजपेयी, उनके भाई प्रेम बिहारी वाजपेयी और शोभाराम गिरफ्तार हुए थे। उधर, क्रांति की ज्वाला फैलती जा रही थी। कागारौल में सिंचाई विभाग का दफ्तर फूंक दिया गया था।
आगरा-धौलपुर रेल मार्ग पर स्टेशन से एक किलोमीटर दूर गांव नगरा पाडम के पन्नालाल, ख्यालीराम, भुम्म सिंह ने पटरी उखाड़ दी थी। प्रशासन सकते में आ गया था। गांव पर 10 हजार का जुर्माना किया गया। इसकी वसूली के लिए स्त्री और बच्चों तक पर बर्बरता की गई थी। इसके बावजूद क्रांतिकारियों के कदम पीछे नहीं हटे थे।