आजादी की जंग लड़ने में परखम भी पीछे नहीं था आजादी के योद्धाओं ने स्वराज की हुंकार उठते ही गांव में मालगाड़ी पलट दी थी। 10 अगस्त 1942 को शहर में छात्रों ने विदेशी सत्ता का अंत करने और जुल्मों के खिलाफ जोरदार जुलूस निकाला था।
13 अगस्त को गांव-गांव आजादी को लेकर संघर्ष का बिगुल बजने लगे तो गोरी सरकार ने तमाम लोगों को जेल में डाल दिया। उसी दौरान 14 अगस्त को फरह ब्लॉक के गांव परखम में वहीं के निवासी रूपराम के नेतृत्व में भारत माता के सपूतों ने मालगाड़ी को पलट दिया था।
इसके बाद गोरी सरकार की पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने परखम के ग्रामीणों पर जमकर जुल्म किए थे। कई ग्रामीणों को बंदी बना लिया गया था। इसके बाद झुड़ावई, बलरई, ओल समेत जिला के दूसरे गांवों से निकले आजादी के योद्धाओं ने कई गांवों को जोड़कर मंडल बना दिया। प्रतिष्ठित नागरिक भी आंदोलन से जुड़ गए थे।