आगरा। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने कसेरट बाजार में एक निर्माणाधीन अवैध इमारत को बृहस्पतिवार को तीसरी बार सील किया है। यह कार्रवाई अवैध निर्माण जारी रहने और पहले दो बार सील तोड़ने के आरोपों के बाद की गई है।
इससे पहले नौ अप्रैल की रात इसी बाजार में एक तीन मंजिला इमारत ढह गई थी। सील तोड़कर निर्माण करने के आरोप में एडीए ने मनीष बंसल और रिंकू बंसल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद अवैध निर्माण का सिलसिला जारी रहा। प्राधिकरण के प्रवर्तन दल को इसे तीसरी बार सील करना पड़ा है।
आरोप है कि एफआईआर के बावजूद पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ तक नहीं की। बिल्डर ने न केवल विभाग की सील तोड़ी, बल्कि ध्वस्तीकरण के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए तीसरी बार अवैध निर्माण खड़ा कर दिया। इस मामले में एडीए उपाध्यक्ष एम. अरुन्मोली ने पिछले माह संबंधित सुपरवाइजर, अवर अभियंता और सहायक अभियंता को नोटिस जारी किया था। मनीष बंसल और रिंकू बंसल के खिलाफ थाना कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
150 साल पुराने भवन पर निर्माण
सीताराम कॉलोनी, बल्केश्वर निवासी सराफा कारोबारी मनीष बंसल और रिंकू बंसल ने कसेरट बाजार में करीब 150 वर्ष पुराना एक भवन खरीदा था। इस पुराने ढांचे के आगे के हिस्से में शोरूम बना दिया गया, जबकि पिछले हिस्से में बिना किसी स्वीकृत मानचित्र के निर्माण कार्य चल रहा था। 9 अप्रैल की रात इसी निर्माण के दौरान पूरी बिल्डिंग धराशायी हो गई।
पहले भी गिरा था पड़ोसी का मकान
निर्माण का यह विवादित सिलसिला साल 2024 से जारी है। 22 अप्रैल, 2024 को निर्माण के दौरान बगल का मकान गिर गया था। तब गनीमत रही कि वहां कोई मौजूद नहीं था। बिल्डिंग गिरने के बाद एडीए ने जांच में पाया गया कि मानचित्र स्वीकृत नहीं है। इसके बाद एडीए ने निर्माण को सील कर दिया था। बिल्डर ने विभाग की सील और एफआईआर को दरकिनार कर फिर से अवैध निर्माण शुरू कर दिया।
सवालों के घेरे में एडीए के अधिकारी
इतने बड़े पैमाने पर सील तोड़कर निर्माण कार्य होता रहा, लेकिन क्षेत्रीय सुपरवाइजर और इंजीनियरों को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह चर्चा का विषय बना हुआ है। उपाध्यक्ष एम. अरुन्मोली ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली वार्ड के सुपरवाइजर, अवर अभियंता और सहायक अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
होगी सख्त कार्रवाई
सील तोड़कर निर्माण करना एक गंभीर अपराध है। इस निर्माण के खिलाफ पहले ही ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए जा चुके थे। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और अवैध निर्माण करने वाले बिल्डर के खिलाफ एफआईआर कराई थी। अब और सख्त कार्रवाई की जाएगी। - एसबी सिंह, प्रर्वतन प्रभारी, एडीए