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सपा सांसद के घर हमला: गेट टूट जाता तो कोई नहीं बचता...60 मिनट तक अटकी रहीं सांसें, पुत्रवधू ने बयां की दहशत

Fri, 28 Mar 2025 10:28 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

करणी सेना ने जब सांसद रामजीलाल सुमन के घर पर हमला किया, उस दौरान उनके पुत्रवधू प्रियंका सुमन और दो मासूम नाती घर पर थे। इस हमले से वे लोग डर से सहम गए। 
 
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पुत्रवधू ने बयां की दहशत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मैं घर के अंदर ही थी। दोनों बच्चे भी खेल रहे थे। अचानक लोग आए। दरवाजा खोलकर अंदर आने की कोशिश करने लगे। कुर्सियां फेंक रहे थे। थोड़ी देर में ही पथराव भी होने लगा। इससे बच्चे सहम गए। वह अंदर के कमरे में चले गए। इससे 1 घंटे तक दहशत में रहे। मगर, उसका सामना किया। बच्चों को भी समझाया। सरकार सुरक्षा के दावे कर रही है। वहीं दूसरी तरफ महिलाएं घर में भी सुरक्षित नहीं हैं। यह कहा, राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन की पुत्रवधू प्रियंका सुमन का। वह पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रही थीं।
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अमर उजाला ने बृहस्पतिवार को प्रियंका सुमन से बातचीत की। वह सांसद पुत्र रणजीत सुमन की पत्नी हैं। रणजीत जलेसर विधानसभा से पूर्व विधायक हैं। उन्होंने (प्रियंका) कहा कि विरोध का यह तरीका ठीक नहीं है। उपद्रवी घर तक आ गए। वह कुछ भी कर सकते थे। बुधवार को मैं और 2 बच्चे ही घर में थे। पति बाहर कार्यकर्ताओं के साथ थे, तभी भीड़ ने हमला किया। बच्चे बुरी तरह से डर गए थे। इसलिए बच्चों को अंदर के कमरे में ले गए। कुछ देर के लिए दहशत रही। अगर, भीड़ अंदर आ जाती तो उनके साथ कुछ भी हो सकता था। बाद में पुलिस आई। तब उपद्रव करने वाले चले गए। उन्होंने कहा कि जब सांसद परिवार पर हमला किया जा रहा है तो आम लोग कैसे सुरक्षित रह सकते हैं। सरकार महिला सुरक्षा के दावे कर रही है।


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पुलिस प्रशासन के सामने हमला, फिर भी छोड़ दिए उपद्रवी
उधर, रणजीत सुमन ने कहा कि परिवार ठीक है, लेकिन यही सोच रहे हैं कि राजनीति में विरोध किया जाता है, लेकिन जिस तरह से लोग हमला कर रहे हैं, यह सोचा नहीं था। घर में पत्नी और बच्चे थे, हमलावर उनके साथ कोई भी अप्रिय घटना कर सकते थे। पूरे पुलिस प्रशासन के सामने झगड़ा हुआ था। इसके बावजूद पकड़े गए लोगों को किस परिस्थिति में छोड़ा गया, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

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तो हौसले हो जाएंगे बुलंद
ऐसी घटनाओं के बाद भी आरोपियों को छोड़ा जाएगा तो उनके हाैसले बुलंद होंगे। दो दिन से लगातार धमकी मिल रही थी। इसके बावजूद भीड़ जुटी। बैरियर को राैंदते हुए हमलावर आए। पुलिस इनको रोक सकती थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अब मांग यही है कि जिन लोगों को राजनीति में किसी तरह की बात पसंद नहीं आती है, उसका विरोध करना चाहिए। अब विरोध नहीं हो रहा है, हमले हो रहे हैं। यह ठीक नहीं है।

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