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Agra News: बिना स्टेडियम बाह के खिलाड़ी कर रहे नाम, जीता मुकाम

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बाह: खेल दिवस पर विशेष-रोहित यादव - फोटो : Samvad
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बाह। भदावर की मिट्टी के खिलाड़ियों ने बिना स्टेडियम के भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। जैतपुर के विजय सिंह चौहान ने ओलंपिक तक का सफर तय कर देश का मान बढ़ाया है। कई खिलाड़ियों ने खेल के दम पर सरकारी नौकरी भी हासिल की है।
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क्वारी के अजीत भदौरिया और जैतपुर के विजय सिंह चौहान ने अर्जुन अवॉर्ड जीता है। मनीषा कुशवाह और नरेश यादव जैसे खिलाड़ियों ने खेल के बूते नौकरी पाई है। नरेश यादव ने दो साल पहले जनवरी में नॉर्थ ईस्ट जोन इंटर यूनिवर्सिटी भुवनेश्वर में 110 मीटर बाधा दौड़ का कांस्य पदक जीता था। 2018 में उन्होंने दिल्ली राज्य गेम्स में 110 मीटर बाधा दौड़ का 1998 का रिकॉर्ड तोड़कर स्वर्ण पदक जीता। नरेश यादव ने 14.28 सेकंड का नया रिकॉर्ड बनाया था। चंडीगढ़ राज्य एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी उन्होंने स्वर्ण पदक सहित कई राष्ट्रीय पदक जीते हैं।
बाह के गोपालपुरा गांव की मनीषा कुशवाह ने दो साल पहले लखनऊ के सांई स्टेडियम में ऑल इंडिया पुलिस नेशनल गेम्स में 400 मीटर रिले दौड़ में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने खेल कोटे से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) में हेड कांस्टेबल की नौकरी प्राप्त की है। फेडरेशन कप तमिलनाडु में भी रजत पदक जीतकर भारतीय टीम में जगह बनाई।
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वहीं, बाह के गोहरा गांव के गौरव यादव ने चंबल के बीहड़ में दौड़कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। उन्होंने राज्य एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 1500 मीटर दौड़ में दो साल पहले कांस्य पदक जीता था। जून में भोपाल में हुए राष्ट्रीय स्कूल गेम्स में गौरव ने 1500 मीटर दौड़ में कांस्य और 3000 मीटर दौड़ में रजत पदक जीता। बाह के उधन्नपुरा गांव के रोहित यादव तीन साल से ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में कानपुर विश्वविद्यालय का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने पिछले साल प्रयागराज ओपन चैंपियनशिप में 10 मीटर एयर राइफल निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीता था।
आयरन मैन ऑफ एशिया के नाम से मशहूर जैतपुर के विजय सिंह चौहान ने 1973 में मनीला एशियाई चैंपियनशिप में डेकैथलॉन का स्वर्ण पदक जीता था। उनका 7378 अंक का रिकॉर्ड छह साल तक कायम रहा। 1971 में कुआलालंपुर में उन्होंने 110 मीटर बाधा दौड़ और डेकैथलॉन में दोहरा स्वर्ण पदक जीता। विजय सिंह चौहान ने 1972 के म्यूनिख ओलंपिक खेलों और 1974 के तेहरान एशियाई खेलों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश सरकार में खेल निदेशक रहे विजय सिंह चौहान को मिला अर्जुन अवॉर्ड आज की पीढ़ी को प्रेरणा देता है।
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