नाम बड़े और दर्शन छोटे.... सांसदों के गोद लिए आदर्श गांवों की यही हकीकत है। हल्ला तो ऐसे मचाया था जैसे गांवों को लंदन, पेरिस बनाने जा रहे हों, लेकिन काम करने का नंबर आया तो पैसा ठिकाने के सिवाय और कुछ नहीं हुआ।
चार साल बीत गए, लेकिन गांव को आदर्श बनाने जैसा कुछ भी तो नहीं हुआ। सड़क ठीक हो जाए, पीने लायक पानी मिल जाए, स्कूल की हालत सुधर जाए... बस यही तो चाहा था इन गांव के बाशिंदों ने।
यहां बुनियादी सुविधाएं तक मुहैया नहीं करा पाए सांसद। हालात तो ये हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गांव बटेश्वर भी फतेहपुर सीकरी के सांसद चौधरी बाबूलाल ने गोद ले रखा है लेकिन काम यहां भी नहीं हुआ है।
टूटी घ्ााट की सीढ़ियां
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चंबल घाटी की गोद में यमुना के किनारे बसा गांव हिंदुओं की आस्था का केंद्र भी है। फिर भी जनसुविधाओं का अभाव है। लोग कहते हैं कि केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद बटेश्वर की ऐसी उपेक्षा की उम्मीद नहीं थी।
यमुना की सफाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ है। घाटों पर गंदगी रहती है। यहां 101 मंदिरों की शृंखला थी। इसमें से अब महज 40 के आसपास मंदिर हैं, वे भी जर्जर होते जा रहे हैं।
बटेश्वर से परिवहन की व्यवस्था नहीं है। 2006 तक सरकारी बस चलती थीं। अब आटो वालों की मनमानी चलती है। घटनाएं भी हो जाती हैं।
बटेश्वर धार्मिक स्थल है। यहां आए दिन धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। हर वर्ष पशु मेला लगता है लेकिन यहां एकमात्र सार्वजनिक शौचालय है। चारों ओर गंदगी रहती है।
अफसरों ने काम नहीं किया
बटेश्वर को तीर्थस्थल के रूप में विकसित करने का काम सिर्फ कागजों में हुआ है। मंदिर जर्जर हो रहे हैं। कोई देखने वाला नहीं है। गंदगी के अंबार लगे हैं।
बटेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि बसपा सरकार में, विधायक मधुसूदन शर्मा के कार्यकाल में काशी की तर्ज पर आरती प्रारंभ हुई थी, लोग आते थे वह भी बंद हो गई है।
सांसद चौधरी बाबूलाल कहते हैं कि आदर्श गांव योजना के तहत कोई खास काम अभी तक नहीं हुआ है। पिछले तीन वर्ष सपा सरकार के अफसरों ने काम नहीं होने दिए।
पुसैंता के विकास कार्यों के लेकर मेरी अफसरों से बहस भी हुई थी। अब हमारी सरकार तब आई तब कड़ाई करने पर प्रस्ताव बने हैं। जो प्रस्ताव गए हैं उनके लिए भी अभी तक फंड रिलीज नहीं हुआ है।