फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आगरा किला में मोती मस्जिद के दक्षिणी पाथवे का संरक्षण करेगा एएसआई, जानें इसका इतिहास

Thu, 14 Jan 2021 04:34 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
आगरा किले में होता संरक्षण कार्य - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

आगरा किला में मोती मस्जिद के मडपैक ट्रीटमेंट के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) इसके दक्षिणी ओर मौजूद पाथवे का संरक्षण करने जा रहा है। आगरा किला में सेना के कब्जे वाले हिस्से में रहने के कारण लंबे समय से मुगलकालीन पाथवे का संरक्षण नहीं हो पाया और यहां झाड़ियां और मलबा पड़ा हुआ है। एएसआई फरवरी में पहली बार इसका संरक्षण शुरू करेगा, जिसमें 6 माह का समय लग सकता है। मोती मस्जिद से सटे मीना बाजार में एएसआई ऐसे ही पाथवे तीनों ब्लॉक में निकालकर संरक्षित कर चुका है।

विज्ञापन


एएसआई आगरा किला में सेना के कब्जे वाले हिस्से में रही मोती मस्जिद के दक्षिणी हिस्से में मौजूद पुराने पाथवे का संरक्षण 23.04 लाख रुपये की लागत से करेगा। इस मस्जिद के एक ओर मीना बाजार और दूसरी ओर शिवाजी की कथित जेल का संरक्षण एएसआई पहले ही कर चुका है। अब मस्जिद के दक्षिणी हिस्से की बारी है। 

संगमरमर से तामीर सबसे बड़ी मस्जिद
मुगल बादशाह शाहजहां ने साल 1647 में किले में मोती मस्जिद का निर्माण शुरू कराया ,जो 1654 में पूरा हो सका। संगमरमर से तामीर की गई यह मस्जिद एशिया में अपनी तरह की सबसे बड़ी और अनूठी मस्जिद है। उस समय तीन लाख रुपये की लागत इसके निर्माण पर आई थी। 

विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

234 फुट लंबी और 187 फुट चौड़ी मस्जिद संगमरमर से बनी है, जबकि बाहरी दीवारें लाल पत्थर की हैं। मस्जिद के आंगन में बना टैंक वर्गाकार है, जिसकी प्रत्येक दिशा में लंबाई 37 फुट है। मुख्य इमारत के ऊपर तीन गुंबद बने हैं, जो ताज से नगीनों की तरह चमकते नजर आते हैं। 

मडपैक ट्रीटमेंट के दौरान सफेद संगमरमर के एक पत्थर को छोड़ दिया गया, जिससे प्रदूषण के कारण काली पड़ गई मस्जिद का संगमरमर और अब की स्थिति में अंतर स्पष्ट नजर आता है। एएसआई अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि मोती मस्जिद के दक्षिणी ओर पुराने पाथवे का संरक्षण अगले माह शुरू करा दिया जाएगा। इसकी प्रक्रिया चल रही है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें