जिन दादा की उंगली पकड़कर उसने चलना सीखा उनकी ख्वाहिश पूरी करने के लिए दादा के सपने को अपना बना लिया। मैनपुरी के आरसीएम महाविद्यालय की एमए संगीत की छात्रा आशा किरण ने दीक्षांत समारोह में दो स्वर्ण और एक रजत पदक के साथ संयुक्त रूप से तीसरा स्थान प्राप्त किया।
मैनपुरी के आरसीएम महाविद्यालय की छात्रा आशा ने बताया कि संगीत के क्षेत्र में पढ़ाई करने का निर्णय लेने पर लोगों ने कहा कोई प्रोफेशनल कोर्स करो जिससे अच्छी नौकरी मिल सके। लेकिन मुझे अपने दादा का सपना पूरा करना है। वो कहते थे कि संगीत से हर दर्द को दूर कर सकते हैं। कक्षा 6 से ही उन्होंने मुझे संगीत की शिक्षा खुद देना शुरू कर दिया था वो बेहतरीन हारमोनियम बजाते थे। उन्होंने गांव में पहला स्कूल खुलवाया, जो अब इंटर कॉलेज हो चुका है। मैं संगीत की शिक्षिका बन सुरों की साधना करना चाहती हूं। आशा के पिता जितेंद्र सिंह चौहान प्रिंटिंग प्रेस का व्यापार करते हैं और मां शशि चौहान गृहणी हैं। कहते हैं बेटी ने जो रास्ता चुना है उसके साथ हैं। उसने हमारा नाम रोशन किया है। आगे भी अच्छा करेगी।
ये मिले पदक
डॉ. किशन कपूर स्मारक (रजत) पदक
डॉ. अजय खन्ना स्मृति (स्वर्ण) पदक
चौधरी सनक सिंह (स्वर्ण) पदक
तीन पदक विजेता छात्र-छात्राएं
इन्हें मिले तीन मदद
अनुष्का को तीन स्वर्ण पदक मिले।
मुंशी राम शर्मा (स्वर्ण) पदक
श्री बीपी श्रीवास्तव (स्वर्ण) पदक
कु. नीरू डेका स्मृति (स्वर्ण) पदक
निखिल को दो स्वर्ण और एक रजत
श्रीमती धनदेवी कपूर (रजत) पदक
श्रीमती जगदंबा स्मारक (स्वर्ण) पदक
डॉ. अचिंत कुमार स्मृति (स्वर्ण) पदक
साक्षी को मिले तीन स्वर्ण
धूर्जटी प्रसाद बागची (स्वर्ण) पदक
श्रीमती मीरा अग्रवाल स्मृति (स्वर्ण) पदक
महंत उद्धवपुरी संस्कृताचार्य (स्वर्ण) पदक