उत्तर प्रदेश के एटा जिले के कस्बा जैथरा में वर्षों पुरानी प्रथा के अनुसार दुधारू पशुओं की सुरक्षा के लिए पूजा की गई। ये पूजा प्रतिवर्ष हिन्दू माह अषाढ़ी पूर्णिमा पर होती है। मान्यता है कि इस पूजा से पशुओं में होने वाली बीमारियां नहीं होती हैं और वे सुरक्षित रहते हैं।
पशुओं की सुरक्षा के लिए नगरवासी प्रतिवर्ष हिन्दू माह अषाढ़ी पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर नगर में पूजा हुई। इस प्रथा में नगर के युवक मां काली एवं बजरंग बली के स्वरूप रखकर आग से जलता हुआ खप्पर उठाते हैं। इसके बाद नगर के पशुपालकों के दरवाजे पर रखी मटकियों को फोड़ पशुओं के निरोग रहने की प्रार्थना की जाती है।
सोमवार को नगर में स्थित मां गामादेवी के मन्दिर पर शाम चार बजे से सैकड़ों किलो धूप सामग्री से रात 10 बजे तक हवन हुआ। हवन के बाद पूरे नगर के चारों तरफ नगर के निवासी जयवीर सिंह ने दूध व जल की धार लगाई। जबकि गुलेश कुमार उर्फ गुल्ला व उनके साथियों ने मां काली व हनुमान के रूप में खप्पर लेकर नगर के सभी पशुपालकों के दरवाजे पर जाकर मटकियों को फोड़ा।
नगर देवी से पशुओं की सुरक्षा व निरोग रहने की कामनाएं की गईं। जितेन्द्र सिंह उर्फ जन्ट चच्चा, अमन, चन्दन, श्यामू, योगेश, सोनू आदि लोग मौजूद रहे।