मां... तुम देख लेना। जब सीमा पर दुश्मनों से लड़ाई होगी तो तेरा यह बेटा सबसे आगे रहेगा। दुश्मनों को देश की सीमा में घुसने नहीं दूंगा। तुम याद रखना मेरे यारों एक दिन तुम्हारा यह दोस्त ऐसा काम कर जाएगा कि पूरा देश गर्व करेगा।
बस अगर मुझे कुछ हो जाए तो मेरे परिवार का ध्यान रखना। रामवीर सिंह जब भी छुट्टी पर आते थे तो अपनी मां, दोस्त और परिवार वालों से इस तरह कहा करते थे। एक बात तो अक्सर कहते थे... जाट का बेटा हूं, दुश्मनों के सीने छलनी न कर दूं तो कहना।
वाकई 8-जाट रेजीमेंट का शेर था रामवीर सिंह। पच्चीस साल की उम्र में ही रामवीर सिंह सेना का एक ऐसा लड़ाका बना कि आतंकियों के खिलाफ होने वाले हर स्पेशल आपरेशन में उन्हें रखा जाता था। अब तक 30 से भी ज्यादा आपरेशन में रामवीर सिंह शामिल रह चुके थे।