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मां...दुश्मनों को देश की सीमा में घुसने नहीं दूंगा, वीर सपूत ने शहादत देकर निभाया वादा

Sat, 03 Aug 2019 02:35 PM IST
Abhishek Saxena पुनीत शर्मा, कोसीकलां-मथुरा
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शहीद रामवीर का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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मां... तुम देख लेना। जब सीमा पर दुश्मनों से लड़ाई होगी तो तेरा यह बेटा सबसे आगे रहेगा। दुश्मनों को देश की सीमा में घुसने नहीं दूंगा। तुम याद रखना मेरे यारों एक दिन तुम्हारा यह दोस्त ऐसा काम कर जाएगा कि पूरा देश गर्व करेगा। 
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बस अगर मुझे कुछ हो जाए तो मेरे परिवार का ध्यान रखना। रामवीर सिंह जब भी छुट्टी पर आते थे तो अपनी मां, दोस्त और परिवार वालों से इस तरह कहा करते थे। एक बात तो अक्सर कहते थे... जाट का बेटा हूं, दुश्मनों के सीने छलनी न कर दूं तो कहना।

वाकई 8-जाट रेजीमेंट का शेर था रामवीर सिंह। पच्चीस साल की उम्र में ही रामवीर सिंह सेना का एक ऐसा लड़ाका बना कि आतंकियों के खिलाफ होने वाले हर स्पेशल आपरेशन में उन्हें रखा जाता था। अब तक 30 से भी ज्यादा आपरेशन में रामवीर सिंह शामिल रह चुके थे।
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25 अप्रैल 2014 को कोसीकलां के गांव हुलवाना के इस लाल ने सेना की वर्दी शरीर पर धारण की थी। अब पिछले काफी समय से रामवीर सिंह की पोस्टिंग जम्मू कश्मीर में चल रही थी। रामवीर सिंह मई में एक माह की छुट्टी पर अपने घर आए थे। परिवार के साथ वक्त बिताया। रिश्तेदारों से मिले। 

रामवीर सिंह के परिवार और संग-साथी कहते हैं, बहादुर सैनिक था रामवीर सिंह। जब भी गांव में आता तब एक ही बात किया करता था कि वह जहां भी तैनात रहेगा देश के दुश्मनों को मारता रहेगा। मां कृष्णा से कहा करते थे, मां एक दिन तुम नाज करोगी अपने बेटे पर। तुम्हारा बेटा देश का सच्चा प्रहरी बनेगा। 

रामवीर सिंह के परिवार के अनूप चौधरी का कहना है कि वह गांव के लड़कों को सेना में जाने के लिए प्रेरित किया करते थे। लड़कों को प्रैक्टिस के लिए कहते थे। आज गांव में जब उनके शहीद होने की खबर पहुंची तो उनके साथी और परिवार वाले उन बातों पर चर्चा करते रहे जो रामवीर सिंह अक्सर कहा करते थे। किस तरह देश भक्ति का जज्बा उनके भीतर कूट-कूटकर भरा हुआ था। उनके परिवार से कई दूसरे लोग भी सेना में हैं।
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