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आगरा: पीएम मोदी और कंगना रणौत के खिलाफ मामले में बहस पूरी, 6 अप्रैल को आ सकता है फैसला

Mon, 28 Mar 2022 06:52 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रणौत के भीख में आजादी वाले बयान पर आगरा के अधिवक्ता ने राष्ट्रद्रोह का आरोप लगाते हुए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। इस मामले में बहस पूरी हो गई है। 
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फिल्म अभिनेत्री कंगना रणौत
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विस्तार
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आगरा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अभिनेत्री कंगना रणौत के खिलाफ दायर वाद में सोमवार को कोर्ट में बहस पूरी हो गई। स्पेशल जज (एमपी-एमएलए) अर्जुन की कोर्ट में राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रमाशंकर शर्मा की ओर से अधिवक्ता बीएस फौजदार, रामदत्त दिवाकर, राजेंद्र गुप्ता धीरज, ओपी वर्मा और सत्य प्रकाश शर्मा ने बहस की।

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अधिवक्ताओं ने कहा कि अभिनेत्री कंगना रनौत ने आजादी को भीख में मिली बताकर उन तमाम देश भक्त शहीदों का अपमान किया है, जिन्होंने आजादी के लिए फांसी के तख्ते पर लटककर और अंग्रेजों की गोलियां, दमनकारी अत्याचारों को झेलने के बाद देश को आजादी दिलाई।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को आजाद कराया। अभिनेत्री ने उनके अहिंसात्मक सिद्धांत का उपहास उड़ाया। देश के प्रधानमंत्री का दायित्व है कि उन्हें ऐसे राष्ट्र विरोधी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन वो मौन साधे रहे। कोर्ट ने बहस सुनने के बाद छह अप्रैल की तिथि आदेश के लिए नियत कर दी है।

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यह है मामला

राजीव गांधी बार एसोसिएशन आगरा के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने 23 नवंबर 2021 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। यह प्रार्थना पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अभिनेत्री कंगना रणौत के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज करने के लिए है।  

प्रार्थनापत्र में कहा गया कि 17 नवंबर 2021 को समाचार पत्रों में कंगना रणौत की टिप्पणी प्रकाशित हुई थी। इसमें कंगना ने आजादी को भीख में मिली और चांटा खाने से आजादी नहीं भीख मिलती है, टिप्पणी की थी।

अधिवक्ता ने कंगना की टिप्पणी को राष्ट्रपिता के अहिंसात्मक सिद्धांत का मजाक, लाखों देशभक्त शहीदों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अपमान का आरोप लगाया। साथ ही कहा है कि प्रधानमंत्री द्वारा कंगना के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने से राष्ट्रद्रोही तत्वों को बढ़ा मिल रहा है।
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