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अपराजिता: चुनौतियां का सामना कर खुद खड़ी हो रहीं अपराजिताएं, संघर्ष और साहस से पाया मुकाम

Fri, 24 Sep 2021 12:59 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा

सार

पढ़ी लिखी महिलाएं जहां शिक्षा के क्षेत्र में नई मंजिल तलाश रही हैं, वहीं कम पढ़ी लिखी महिलाएं सरकार से मिलने वाले अनुदान के बाद छोटा व्यापार शुरू करने की तैयारी में हैं। इन महिलाओं का मानना है कि जीवन से संघर्ष करने की जो सीख उन्हें उनके पति से मिली, वही आज उनकी ताकत बन चुकी है। 
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अपराजिता: रिंकी लता और साक्षी वोहरा बांए से दाएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना महामारी के दंश से शहर के कई परिवार प्रभावित हुए हैं। महामारी की दूसरी लहर में कई परिवारों के परिजन असमय ही काल के गाल में समा गए, जिससे उनकी रोजी रोटी का सहारा भी छिन गया। ऐसे में पति की मौत के बाद शहर की तमाम महिलाएं अपने संघर्ष और साहस के दम पर न सिर्फ परिवार का सहारा बनीं बल्कि घर चलाने का पूरा बोझ अपने कंधों पर ले लिया। कभी घर में ही रहने वाली ये महिलाएं अपने अथक प्रयासों और सरकार की योजनाओं के दम पर आगे बढ़ रही हैं। पढ़ी लिखी महिलाएं जहां शिक्षा के क्षेत्र में नई मंजिल तलाश रही हैं, वहीं कम पढ़ी लिखी महिलाएं सरकार से मिलने वाले अनुदान के बाद छोटा व्यापार शुरू करने की तैयारी में हैं। इन महिलाओं का मानना है कि जीवन से संघर्ष करने की जो सीख उन्हें उनके पति से मिली, वही आज उनकी ताकत बन चुकी है। 

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शिक्षिका बनकर ही रहूंगी: रिंकी लता
बाईंपुर की रहने वाली रिंकी लता की आंखें पति अरविंद कुमार को याद कर नम हो जाती हैं। कोरोना काल के उन लम्हों को यादकर आज भी उनकी रूह कांप उठती है। रिंकी बताती हैं कि कोरोना ने उनके परिवार के जीने का सहारा छीन लिया। ऐसे में परिवार के संचालन का बोझ उनके कंधों पर आ गया। इस कठिन समय में मेरी शिक्षा मेरा हथियार बनने जा रही है। मैंने एमए बीएड कर रखा है। इसलिए मुझे उम्मीद है कि स्कूल में नौकरी मिलने में कोई खास दिक्कत नहीं होगी। रिंकी के पति अरविंद शिक्षा विभाग में तैनात थे।  

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सकारात्मक सोच के साथ शुरू किया ब्यूटी पार्लर : साक्षी वोहरा
आगरा। इन दिनों ब्यूटी पार्लर चला रहीं साक्षी वोहरा के पति का कोरोना से निधन हो गया। साक्षी बताती हैं कि पति की मौत के बाद से परिवार की जीविका का साधन सामाप्त हो गया और घर चलाने की जिम्मेदारी उन पर आ गई। नई चुनौतियों का सामना करने हुए साक्षी ने ब्यूटी पार्लर खोल लिया है। साक्षी का कहना है कि उन्होंने हमेशा सकारात्मक सोचा। इसलिए जो सोचा, वो मिलता भी जा रहा है।

कभी नहीं मानी हार 
लॉयर्स कॉलोनी में रहने वाली भारती के जीवन में उस समय अंधेरा छा गया, जब उनके पति की मई में कोरोना के कारण मौत हो गई। परिवार की जिम्मेदारी उनके सिर आ गई। पति के जाने का गम उन्हें सताता रहा, लेकिन इस विषम परिस्थिति में भी उन्होंने हार नहीं मानी। भारती का कहना है कि परिवार चलाने के लिए मैंने खुद नौकरी करने का पैसला लिया। आज में प्राइवेट कंपनी में काम कर रही हूं।

अपराजिता: व्यापार शुरू करने पर मिली चुनौतियां अपार, साथ न आया परिवार, पढ़ें इन महिलाओं की सफलता की कहानी
 
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