वृंदावन के बांके बिहारी कॉरिडोर मंदिर फंड से बनाने की अपील के साथ हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की गई है। ये पिटीशन उप्र सरकार के अटॉर्नी जनरल ने दाखिल की है।
वृंदावन के श्रीबांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर निर्माण का मामला एक बार फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट में पहुंच गया है। उप्र शासन ने हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की है, जिसमें अपील की है कि कॉरिडोर को मंदिर फंड से न बनाने के आदेश का हाईकोर्ट रिव्यू करे। कॉरिडोर की जमीन का अधिग्रहण और निर्माण मंदिर फंड से ही बनाने की अनुमति दी जाए, ताकि निर्माण पूरा होने के बाद इसे मंदिर में सम्मिलित किया जा सके। मंदिर प्रबंधन भविष्य में इसका संचालन कर पाए। प्रकरण की अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी।
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उप्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने हाई कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की है। इसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट से 20 नवंबर 2023 के आदेश को रिव्यू करने की अपील की गई है। इसमें कहा गया है कि हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि कॉरिडोर का निर्माण हो, लेकिन इसमें मंदिर फंड का इस्तेमाल न करें। सरकार अपने स्तर से इसका खर्च वहन करे। रिव्यू पिटीशन में कोर्ट से अपील की गई है कि अगर सरकार अपने खर्च से जमीन खरीदेगी तो उस पर सरकार का मालिकाना हक होगा। इसी प्रकार कॉरिडोर के निर्माण पर सरकार धनराशि खर्च करेगी तो उस पर भी सरकार का ही अधिकार होगा। कॉरिडोर को मंदिर से क्लब किया जा सके और मंदिर प्रबंधन कमेटी इसका संचालन कर सके, इसके लयह जरूरी है कि मंदिर फंड से ही कॉरिडोर का निर्माण कराया जाए। बीते सप्ताह इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई भी हुई। अब 5 अगस्त को फिर से हाईकोर्ट सुनवाई करेगा।
ऑर्डर स्टे की एसएलपी सुप्रीम कोर्ट से खारिज
हाईकोर्ट से कॉरिडोर निर्माण का रास्ता सशर्त साफ होने के बाद गोसाई समाज के पक्षकारों ने ऑर्डर पर स्टे की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की थी। इस एसएलपी को सुप्रीम कोर्ट से 30 अप्रैल 2024 को यह खारिज कर दिया गया है।
मंदिर का चढ़ावा बांके बिहारी जी का है...
गोसाई समाज के पक्षकार अशोक गोस्वामी ने बताया कि बीते सप्ताह अटॉर्नी जनरल उप्र सरकार ने हाईकोर्ट में कहा है कि बांके बिहारी मंदिर का ट्रस्ट बनाए जाए। सरकार एक प्रकार से सेवा-पूजा, मंदिर संचालन व्यवस्था आदि अपने कब्जे में लेना चाहती है। इसी प्रकार इन्होंने अयोध्या में राम मंदिर को पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया। मंदिर का चढ़ावा बांके बिहारी जी का है। बिहारी जी की सेवा में ही उसका उपयोग किया जाए। हाईकोर्ट में पूर्व में ही एक अर्जी दाखिल कर बता चुके हैं कि ठाकुर बांके बिहारी महाराज गोस्वामी समाज के पूर्वज स्वामी हरिदास जी की संपत्ति हैं, वह अपनी संपत्ति (बिहारी जी) को अपनी संतानों को दे गए थे। सेवा-पूजा गोस्वामी समाज का जन्मसिद्ध अधिकार है, इसको चुनौती नहीं दी जा सकती है।
तो रिव्यू पिटीशन की खातिर सरकार नहीं बढ़ा रही कॉरिडोर निर्माण को कदम
हाईकोर्ट से 20 नवंबर 2023 को सशर्त कॉरिडोर निर्माण का रास्ता साफ होने के बाद भी सरकार इसके निर्माण तो दूर जमीन अधिग्रहण की दिशा में कदम नहीं बढ़ रही है। रिव्यू पिटीशन की जानकारी सामने आने के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि सरकार इस पर हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार कर रही है।
प्रशासन के सामने यह चुनौतियां खड़ी
5.65 एकड़ जमीन कॉरिडोर के लिए अधिग्रहण करना प्रस्तावित है। वर्तमान स्थिति की बात करें तो इसको करार नियमावली के तहत लेने के लिए लोगों को समझना प्रशासन के लिए चुनौती भरा है। इसके अलावा 300 करोड़ रुपये जमीन खरीदने और 600 करोड़ रुपये कॉरिडोर निर्माण के लिए सरकार से मंजूर कराना भी प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर है। वर्तमान बांके बिहारी मंदिर करीब तीन एकड़ में बना है। यह जमीन मदन मोहन मंदिर ट्रस्ट के नाम पर है। प्रशासन को इसके अलावा 5.65 एकड़ जमीन कॉरिडोर निर्माण के लिए चाहिए। इस 5.65 एकड़ जमीन पर करीब 300 निर्माण हैं।
प्रस्तावित कॉरिडोर का ऊपरी क्षेत्र एक निगाह में
- क्षेत्रफल- 5.65 एकड़
- ऊपरी क्षेत्र- 10600 वर्ग मीटर
- प्रतीक्षालय- 1800 वर्ग मीटर
- गलियारा- 800 वर्ग मीटर
- परिक्रमा क्षेत्र- 900 वर्ग मीटर
- खुला क्षेत्र- 650 वर्ग मीटर
- सामान घर- 100 वर्ग मीटर
- शिशु देखभाल गृह- 30 वर्ग मीटर
- चिकित्सा सेवा- 80 वर्ग मीटर
- वीआईपी प्रतीक्षालय- 250 वर्ग मीटर
प्रस्तावित कॉरिडोर का निचला क्षेत्र एक निगाह में
- निचला क्षेत्र- 11300 वर्ग मीटर
- खुला क्षेत्र- 518 वर्ग मीटर
- क्षेत्र प्रतीक्षालय- 3500 वर्ग मीटर
- जूता घर- 250 वर्ग मीटर
- सामान घर- 100 वर्ग मीटर
- शिशु देखभाल गृह- 30 वर्ग मीटर
- चिकित्सा सेवा- 90 वर्ग मीटर
- वीआईपी प्रतीक्षालय- 80 वर्ग मीटर
- पूजा सामग्री दुकान- 800 वर्ग मीटर