अपराजिता: रक्तदान कर लोगों की बचा रही जान
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मेरा रक्त सहेली के पति के काम आया: पारूल
आवास विकास कॉलोनी में रहने वाली पारुल भारद्वाज ने जब अपनी सहेली के पति को रक्त दिया, उस दिन उन्हें रक्तदान की असली ताकत पता चली। पारुल बताती हैं कि मेरी सहेली के पति जब घर लौटे, वह दिन मेरे लिए किसी पर्व से कम नहीं था। उस दिन से मैं दूसरों को भी भी रक्तदान के लिए जागरूक कर रही हूं।
रक्तदान करने का महत्व जानती हूं: अंजू
दयालबाग की रहने वाली और सेंट जॉर्जेस स्कूल में शिक्षिका अंजू जसूजा ने पहली बार सन 1995 में अपने रिश्तेदार को रक्त दिया। अंजू बताती हैं कि जब से वह 12 बार रक्तदान कर चुकी हैं। मेरा खून किसी के जीवन को बचाता है, तो मुझे काफी खुशी मिलती है। एक शिक्षिका के नाते मैं रक्तदान के महत्व को अच्छी तरह से समझती हूं।
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