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अपराजिता: बुलंद हौसलों से लिखी सफलता की कहानी, देश-समाज की सुरक्षा ही इनका है लक्ष्य

Wed, 30 Jun 2021 12:11 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

ताजनगरी की युवतियां भारतीय सेना, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स, इंडियन पुलिस सर्विसेज (आईपीएस) में सेवाएं दे रही हैं। ये अन्य युवतियों के लिए प्रेरणा हैं। फोर्स में जाने का जज्बा ऐसा कि किसी ने सेल्स टैक्स डिपार्टमेंट में सीटीओ तो अन्य ने आर्किटेक्ट की नौकरी छोड़ दी।
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अपराजिता: देश की सेवा के लिए सेना और पुलिस का चुना करियर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश सेवा का जज्बा लिए ताजनगरी की युवतियां भारतीय सेना, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स, इंडियन पुलिस सर्विसेज (आईपीएस) में सेवाएं दे रही हैं। ये अन्य युवतियों के लिए प्रेरणा हैं। फोर्स में जाने का जज्बा ऐसा कि किसी ने सेल्स टैक्स डिपार्टमेंट में सीटीओ तो अन्य ने आर्किटेक्ट की नौकरी छोड़ दी। इन अपराजिताओं ने कड़ी मेहनत, लगन और परिश्रम से अपने सपने को साकार किया।

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जो ठाना, उसके लिए मेहनत की
दुर्गा नगर, राजपुर चुंगी निवासी कैप्टन वर्षा चौहान जब भारतीय सेना का अंग बनीं, तो उनके परिवार का सीना चौड़ा हो गया। देहरादून में आर्मी मेडिकल कोर में तैनात कैप्टन वर्षा सियाचीन, लेह आदि स्थानों पर सेवाएं दे चुकी हैं। वर्षा पैरा जंप में महारथ हासिल कर चुकी हैं। बोलीं कि सेना में जाना था। जीवन का और तरीका समझ में नहीं आया, जो ठाना उसके लिए मेहनत करती रही। आखिर मुकाम मिल गया। जीवन में माता-पिता के आशीर्वाद के साथ ही सच्ची लगन और मेहनत सफलता की कुंजी रही। 

देश सेवा मेरे जीवन का गहना
बंगलादेश से लगे दिनाजपुर सीमा पर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर तैनात सरिता सारस्वत ने होश संभालने के बाद से फोर्स में जाने का सपना देखा था। उन्होंने आर्किटेक्ट की नौकरी छोड़कर भारत की सीमाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। कैलाश मोड़ निवासी सरिता बताती हैं कि देश सेवा का यह मौका उनके जीवन में गहने की तरह हैं। परिजनों की परवरिश ने देश की सेवा करने का जज्बा दिया। बचपन में जब टीवी पर आतंकवादियों की नापाक हरकत देखती थी, तो बहुत गुस्सा आता था। पिता शिव प्रसाद शर्मा के आशीर्वाद से आखिर मैंने मुकाम पा लिया।

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सीटीओ की नौकरी छोड़ दी
दिल्ली के नॉर्थ साउथ वेस्ट में डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी) के पद पर तैनात कृष्णा कॉलोनी, जीवनी मंडी निवासी ऊषा रंगनानी ने जो ठाना कर दिखाया। सेल टैक्स में सीटीओ (कॉमर्शियल टैक्स ऑफिसर) पद पर नियुक्ति हो गई थी। लेकिन मन में भारतीय पुलिस सेवा में जाने का सपना पल रहा था। ऊषा रंगनानी बताती हैं कि कुछ कर गुजरने का जज्बा उनको अपने पिता श्याम रंगनानी से मिला। पिता हमेशा कहते थे कि जो सपने देखे हैं, वो तभी पूरे हो सकते हैं, जब पूरी ईमानदारी से परिश्रम किया जाए। आईपीएस बनने के लिए मैंने पूरी लगन से काम किया। रंगनानी का कहना है कि युवतियां जिस क्षेत्र में भी करियर बना रही हैं, पूरी मेहनत करें। उन्हें मंजिल जरूर मिलेगी। 

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