बैंकॉक में 10 मीटर एयर पिस्टल में हुई इंटरनेशनल पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल जीतने वाली सोनिया की वहीं लोग तारीफ करने लगे, जो कभी सोनिया के एयर पिस्टल उठाने पर एतराज करते थे। सोनिया के पिता अपनी बेटी की प्रतिभा को पहचान चुके थे। उन्होंने ही जिस दिन सोनिया को एयर पिस्टल खरीद के दी, उसी दिन सोनिया ने पिता से शूटिंग में मेडल लाने का वादा भी किया।
राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पदक जीत चुकीं महिला निशानेबाजों की कामयाबी का सफर मुश्किलों से भरा रहा है। किसी को पैसे की कमी के कारण प्रैक्टिस चार साल बंद रखनी पड़ी, क्योंकि रायफल तक नहीं खरीद पा रही थी। किसी को परिजन शहर से बाहर भेजने के लिए तैयार नहीं थे लेकिन इनका जज्बा ऐसा था कि लक्ष्य पर ही नजर रखी।
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उधार की रायफल से शुरू की थी प्रैक्टिस
मैं मूल रूप से शिकोहाबाद की हूं। अब परिवार के साथ खंदारी में रहती हूं। मेरा बचपन से सपना था कि निशानेबाज बनूंगी लेकिन यह महंगा खेल है और परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। उधार की रायफल से प्रैक्टिस शुरू तो कर दी लेकिन पैसे की कमी आड़े आ गई। चार साल तक प्रैक्टिस बंद रही लेकिन दिल और दिमाग से शूटिंग नहीं निकली।
मैंने प्राइवेट कंपनी में नौकरी की और पैसे जुटाए। इसके बाद शूटिंग की प्रैक्टिस में लग गई। परिवार ने साथ दिया। दस मीटर एयर रायफल में स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता तो पहचान बन गई। अब नेशनल जीतने का सपना है। -रश्मि जादौन, खंदारी
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शूटर सोनिया शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
परिवार का साथ मिला, औरों की परवाह नहीं की
मैं निशानेबाज बनना चाहती थी। मेरे परिवार ने साथ दिया लेकिन हमारे कई परिचितों को यह ठीक नहीं लगा। वे मानते थे कि लड़कियों का शहर से बाहर जाना सुरक्षित नहीं है। महिला अपराध की कई घटनाओं का उदाहरण देकर वे डराते थे लेकिन मैंने दृढ़ निश्चय कर रखा था।
धीरे धीरे कामयाबी मिली। मुझे मेडल मिलने लगे, मेरी तस्वीर अखबार में आई, फिर किसी ने मना नहीं किया। इंडियन टीम ट्रायल में तीसरा स्थान मिला, 2018 में चैंपियन ऑफ चैंपियंस रही। इससे पहले 2017 की जोनल गोल्ड मेडलिस्ट रह चुकी हूं। -ऋषिका कैम, शेखर रेजीडेंसी, पश्चिमपुरी
मन की सुनी और निशाना लक्ष्य पर रखा
मैं निशानेबाज बनना चाहती थी, पिता ने प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने एयर पिस्टल खरीदकर दी। मैंने प्रैक्टिस शुरू करने के साथ ही संकल्प लिया कि अपने मन के सिवाय किसी की नहीं सुननी है। किसी रिश्तेदार ने कहा कि लड़की को शूटर नहीं, टीचर होना चाहिए, मुझ पर कोई फर्क नहीं पड़ा। पिता से वादा किया था कि एक दिन लक्ष्य को पाकर दिखाऊंगी वर्ष 2018 में नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीता। बैंकॉक में 10 मीटर एयर पिस्टल में इंटरनेशनल पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल जीता। - सोनिया शर्मा , बल्केश्वर
खुद से वादा किया, पूरा करके दिखाया
शूटिंग आसान खेल नहीं है, लड़कियों के लिए तो और भी मुश्किल है... बचपन में ऐसा कुछ लोगों से सुना था, मैंने खुद से वादा किया कि इसे गलत साबित करूंगी, खुशी है कि ऐसा कर पाई। जिस दिन एयर रायफल हाथ में ली, उसी दिन से पदक पर निशाना साधने में लग गई। पहला मेडल जीतते ही आत्मविश्वास बढ़ गया। अब तक नॉर्थ जोन शूटिंग चैंपियनशिप में 17 बार मेडल जीत चुकी हूं। कोच विक्रांत सिंह के निर्देशन में तीन से चार घंटे प्रतिदिन शूटिंग की प्रेक्टिस करती हूं। परिवार ने हमेशा मेरा साथ दिया, इससे मेरी राह आसान हो गई। - ऐश्वर्या शर्मा , दयालबाग
मेडल मिलने के बाद मिली परिवार की अनुमति
मैंने शूटर सोनिया शर्मा को प्रैक्टिस करते देखा था। मन में ख्याल आया कि क्यों न मैं भी शूटिंग सीख लूं। काम आसान नहीं था। एक तो पैसा बहुत चाहिए। दूसरा परिवार की अनुमति मिलना आसान नहीं था। शुरू में जिले में ही प्रतियोगिता में भाग लिया। यहां जीत मिली तो परिवार के लोगों को लगा कि मैं आगे जा सकती हूं। अनुमति मिल गई।
2019 की यूपी स्टेट इंटर स्कूल शूटिंग चैंपियनशिप में सन 2019 में सिल्वर मेडल जीतने वाली मलिका सिंह को भी शूटिंग में करियर बनाने में परेशानियों का सामना करना पड़ा। जिस दिन पहली बार 10 मीटर एयर पिस्टल में उन्होंने फर्स्ट डिस्ट्रिक्ट शूटिंग चैंपियनशिप में यूथ वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। - मलाइका सिंह , घटिया आजम खां