महिला अपना कारोबार शुरू करे तो हर कदम पर चुनौती आती है। मायका हो या ससुराल, परिवार का साथ नहीं मिलता। इसकी वजह यह भी है कि महिलाओं के लिए माहौल पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। दूसरी चुनौती आती है पूंजी की। बैंकों की अपनी शर्तें हैं। पुरुष बाजार में हुंडी वगैरह उठा सकते हैं लेकिन महिलाओं के लिए ऐसी कोई सुविधा नहीं है।
बाजार में जगह बनाने का प्रशिक्षण नहीं मिलता
महिला संघर्ष करते हुए व्यापार शुरू तो कर देती हैं, मैंने भी किया लेकिन सबसे बड़ी चुनौती आई प्रतिस्पर्धा से भरे बाजार में टिकने की। भले ही मैंने दुकान खोली थी लेकिन मुझे मालूम नहीं था कि आसपास के दुकानदारों से प्रतिस्पर्धा में कैसे टिकना है। व्यापार के कई फंडे होते हैं, महिला कोई बिजनेस करे तो उसे आने चाहिए। बाजार में जगह बनाने का प्रशिक्षण नहीं मिलता है, इसकी सुविधा होनी चाहिए।
- रजनी देवी
शुरू में शोरूम में बैठने में डर लगता था
महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल नहीं है। व्यापार की भी यही स्थिति है। मेरे शोरूम पर लोग सामान खरीदने के लिए आते थे, तो कई ऐसे भी होते थे जो घूरते थे। अब उनकी शिकायत करें या व्यापार को संभाले। पूंजी जुटाना भी आसान नहीं, बैंक अधिकारी सौ सवाल करते थे। सिर्फ मेरे साथ नहीं, हर कारोबारी महिला के साथ यह परेशानी आती है।
- कशिश धनवानी
परिवार से भी नहीं मिलता सहयोग
महिला व्यापार करे तो उसे न तो बाहर से सहयोग मिलता है और न ही परिवार से। हालांकि मेरे परिवार ने सहयोग किया। मुझे खुद पर विश्वास था कि बुटीक का काम कर पाऊंगी लेकिन परिवार को नहीं था। दूसरी समस्या पूंजी की आई। बैंक से लोन लिया। इसके बाद बाजार की चुनौती, क्योंकि प्रतिस्पर्धा बहुत है। ऐसे में मैंने क्वालिटी पर ध्यान दिया। इसे मन से निकाला कि लोग क्या कहते हैं, सिर्फ इस पर ध्यान दिया कि जो लक्ष्य तय किया है, वह पूरा कैसे होगा। आखिर कामयाबी मिली। - राखी कौशिक
बैंक से लोन भी मुश्किल से मिला
जब मैं बैंक में यह कहती कि मेरा काम कंपनी की नेटवर्क मार्केटिंग का है तो जवाब मिलता, प्रोजेक्ट बनाकर लाओ, तब लोन पर विचार करेंगे। इसके बाद प्रोजेक्ट दिया तो चक्कर कटवाए। बैंक से लोन आसानी से नहीं मिलता।
उन्हें सबसे पहले गारंटर चाहिए। पूंजी की कमी सबसे बड़ी चुनौती है मेरी जैसी महिलाओं के लिए जो अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हैं। फिर भी यही कहूंगी कि अगर महिला अपना व्यापार शुरू कर रही है तो उसे हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। -मोनिका
हमारा कोई व्यापार मंडल ही नहीं
शहर में महिलाओं के कई संगठन हैं लेकिन महिला कारोबारियों का एक भी नहीं है। अब महिला व्यापारी अपनी बात कहां रखें। मेरे सामने भी यह समस्या आई तो यह मालूम किया कि पेपर ज्वेलरी बनाने का काम कौन-कौन महिलाएं कर रही हैं।
गिनती की थीं, उनसे बात की तो हौसला मिला। महिला व्यापारियों के लिए डिजिटल प्लेटफार्म होना चाहिए। इस पर सभी ट्रेड की महिला कारोबारी हों ताकि एक-दूसरे का सहयोग कर सकें और सलाह ले सकें। -निकिता श्रीवास्तव
महिलाओं के लिए स्टैंडअप योजना बेहतर विकल्प है।
इसमें बिना सिक्योरिटी के 10 लाख से एक करोड़ रुपये तक ऋण मुहैया कराया जाता है।
महिला बचत खाते के तहत एक माह के वेतन के बराबर ओवरड्राफ्ट दिया जाता है।
महिलाओं को अपना प्रोजेक्ट तैयार करना होता है।
यह भी बताना होता है कि क्या कारोबार करेंगी और कैसे।
(जैसा बैंक ऑफ इंडिया की वरिष्ठ प्रबंधक मार्केटिंग रजनी प्रभा ने बताया)