शिक्षिका खुशबू अग्रवाल ने बताया कि हाथों में रचने वाली मेहंदी एक खिलता रंग ही नहीं बल्कि हमारी संस्कृति का हिस्सा है। यह हमारी आने वाली खुशियों का प्रतीक है। इस प्रतियोगिता में खुशी, स्नेहा, राधा, हर्षिता, सिमरन, पलक, नंदनी, अंशिका, लक्षिता, वैष्णवी, मुस्कान, तनिशा, नैनशी, संतुष्टी उत्साह के साथ प्रतिभाग किया।
अपराजिता की रंगोली क्षमा, चित्रांशी, कोमल, कशिश ने सजाई। मेहंदी व रंगोली प्रतियोगिता की संयोजिका ललितेश व खुशबू अग्रवाल संयुक्त रूप से रहीं। प्रधानाचार्य ब्रजबल्लभ शर्मा, अभिलाषा, सरिता, ममता, वंदना, जयश्री, चैलसी, ज्ञानेंद्र, पवन, प्रमोद, डॉली, अमर सिंह, केशव देव, सुनील, विष्णु, उमाशंकर, अमित, नवीन, सुशील भगवान सिंह का प्रमुख सहयोग रहा।
अमर उजाला अपराजिता अभियान में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानाचार्य ब्रजबल्लभ शर्मा ने कहा कि बेटियां किसी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। वे ब्यूटीशियन सिलाई, कढ़ाई जैसे कोर्स करके अपने हुनर से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।