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आगरा: ब्लैक फंगस के एक और संदिग्ध मरीज ने कराई जांच, एसएन मेडिकल कॉलेज में पहले से दो भर्ती

Sun, 16 May 2021 02:18 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

ब्लैक फंगस के मरीज के मामले प्रदेशभर में बढ़ने के साथ आगरा जिले में भी सामने आ रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज में दो मरीजों का इलाज चल रहा है। 
 
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ब्लैक फंगस (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा जिले में कोरोना संक्रमण के बीच ब्लैक फंगस के मरीज भी बढ़ रहे हें। शनिवार को एक और संदिग्ध मरीज ने चिकित्सकों के परामर्श पर सीटी स्कैन कराया। मरीज कोरोना संक्रमण से ठीक हुआ है। जबकि एसएन मेडिकल कॉलेज में पहले से दो मरीज भर्ती हैं। मेडिसिन विभाग के वाह्य रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रभात अग्रवाल का कहना है कि दोनों मरीजों की हालत स्थिर है, उनका इलाज चल रहा है। 

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आठ से दस मरीज दिल्ली रेफर
चिकित्सकों के मुताबिक एसएन मेडिकल कॉलेज में भले ही ब्लैक फंगस के दो ही मरीजों का इलाज चल रहा है। शहर के निजी अस्पतालों से आठ से दस मरीज दिल्ली रेफर किए जा चुके हैं। बता दें कि एसएन मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के मरीजों के उचित उपचार के लिए दवाएं और इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है।  

मैनपुरी के घिरोर क्षेत्र के गांव लपगवां निवासी एक महिला में ब्लैक फंगस के लक्षण मिलने पर दिल्ली के सर गंगा राम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। 13 मई को उनकी आंखों में सूजन आ गई थी। परिजन उन्हें आगरा के कमला नगर स्थित डॉ. अलका सिंघल के अस्पताल में ले गए। यहां से उनको दिल्ली रेफर किया गया। 

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यह इंजेक्शन है सर्वाधिक प्रभावी
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि ब्लैक फंगस बीमारी के इलाज में सर्वाधिक प्रभावी अम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन है। इस समय यह बाजार में भी उपलब्ध नहीं है। इसके बाद आईसोकोनाजोल टेबलेट असरदार है। ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए शासन स्तर से कम से कम 200-300 टेबलेट उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है। मरीज को कम से कम 14 दिन दवा देनी होती है।  

उन्होंने बताया कि पोसोकोनाजोल सिरप भी ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी भी उपलब्धता नहीं है। एसएन मेडिकल कॉलेज में अभी वोरिकोनाजोल टेबलेट की उपलब्धता है। प्राचार्य के मुताबिक यह 15 से 20 फीसदी ही प्रभावी है। शुरुआती दौर में यह दवा दी जाती है। 
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