अनिल यादव की भी बढ़ सकती हैं मुश्किलें
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मुख्यमंत्री महंत आदित्यनाथ योगी ने तलब तो किया है यूपीपीएससी के मौजूदा चेयरमैन अनिरुद्ध यादव को लेकिन मुसीबत पूर्व चेयरमैन अनिल यादव की भी आ सकती है। इसकी दो बड़ी वजह हैं। एक तो उनके कार्यकाल में हुई नियुक्तियों पर सबसे ज्यादा विवाद हुआ था। भाजपा एमएलसी दिनेश सिंह ने इसकी शिकायत सीएम से की है। दूसरा, उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों को आगरा पुलिस छिपा गई थी। उनकी हिस्ट्रीशीट तक फाड़ दी गई है। अब शासन से ऐसे संकेत आ रहे हैं कि नियुक्तियों के साथ हिस्ट्रीशीट फाड़े जाने के मामले में जांच के आदेश दिए जा सकते हैं।
शासन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस केस की फाइल खोले जाने की तैयारी चल रही है। अनिल यादव आगरा के कमला नगर के रहने वाले हैं। उनके खिलाफ चौथ वसूली और डकैती जैसी संगीन धाराओं के केस दर्ज हैं। उनकी न्यू आगरा थाना में हिस्ट्रीशीट है। उन्हें सपा सरकार के दौरान अप्रैल 2013 में उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। हाईकोर्ट के आदेश पर अक्तूबर 2015 में पद से बर्खास्त किया गया था। उसी दौरान यह जानकारी सामने आई थी कि पुलिस ने न्यू आगरा थाने के रिकार्ड से उनकी हिस्ट्रीशीट फाड़ दी थी। शासन को भी गलत जानकारी भेजी गई थी।
संगीन मामलों का ब्योरा छिपा लिया गया था। इसके बाद तत्कालीन डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने अनिल यादव के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों का ब्योरा नए सिरे से तैयार कराया था। लेकिन थोड़े दिन बाद लक्ष्मी सिंह का तबादला हो गया था। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। अनिल यादव का पैतृक गांव बागपत में खेकड़ा के पास है। वह मैनपुरी में डिग्री कालेज के प्रिंसिपल भी रहे।
अफसरों को भी देना होगा जवाब
आगरा। भाजपा ने चुनाव के दौरान यह मुद्दा भी जोर शोर से उठाया था कि सपा के शासन में हिस्ट्रीशीटर को उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग का चेयरमैन बना दिया गया। आगरा के पुलिस अधिकारी अनिल यादव की हिस्ट्रीशीट को तब छिपा रहे थे। अब उनसे भी जवाब तलब किया जा सकता है। यह भी पूछा जा सकता है कि हिस्ट्रीशीट फाड़े जाने के मामले में क्या कार्रवाई की गई।
एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर चली थी लाठी
आगरा। फरवरी 2015 में एबीवीपी कार्यकर्ता अनिल यादव को हटाने की मांग को लेकर कमला नगर में उनके घर के बाहर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया था। इसके विरोध में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भी धरना दिया था। लाठीचार्ज कराने वाले अधिकारियों को सपा शासन में बढ़िया पोस्टिंग मिलती रही ।