राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, आगरा में 59.4 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं, जिससे जिला मंडल में दूसरे स्थान पर है। मथुरा में यह आंकड़ा 63 प्रतिशत है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आयरन के साथ फोलिक एसिड, विटामिन बी12 और अन्य पोषक तत्वों की कमी भी एनीमिया का कारण बन सकती है।
थकान, सांस फूलना और चेहरे की रंगत फीकी पड़ना केवल काम का बोझ नहीं बल्कि साइलेंट किलर कहे जाने वाले एनीमिया के लक्षण हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के अनुसार, आगरा मंडल में महिलाओं में एनीमिया का स्तर गंभीर चिंता का विषय है। केवल आगरा में 59.4 प्रतिशत महिलाएं और गर्भवती इसकी चपेट में हैं।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि केवल आयरन की गोलियां खाना काफी नहीं है। पौष्टिक आहार से समस्या का समाधान हो सकता है। लेडी लाॅयल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅ. आशु ने बताया कि एनीमिया केवल आयरन की कमी नहीं बल्कि फोलिक एसिड, विटामिन बी12 और विटामिन-ए जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों के अभाव का परिणाम है। गर्भावस्था में इसका गंभीर असर मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर पड़ता है।
गर्भवती महिलाओं को आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां दी जाती हैं। गंभीर मामलों में आयरन सुक्रोज या एफसीएम इंजेक्शन दिए जाते हैं। हालांकि, जागरूकता की कमी और अनियमित सेवन अब भी बड़ी चुनौती हैं। जिला अस्पताल की वरिष्ठ डायटीशियन ललितेश शर्मा का कहना है कि भोजन के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीने से बचें। इनमें मौजूद टैनिन आयरन के अवशोषण को रोकते हैं। इसके अलावा, कैल्शियम और आयरन को कभी भी एक साथ न लें। उन्होंने थाली में पौष्टिक आहार प्रचुर मात्रा में लेने की सलाह दी है।