पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ रहा हुनर
नर्सरी के काम में जुटे गांव वालों को यह नहीं पता कि यह काम कब और कैसे शुरू हुआ। पीढ़ी दर पीढ़ी यह हुनर आगे बढ़ता जा रहा है। उन्होंने इसके लिए कोई प्रशिक्षण नहीं लिया। बाप-दादा के साथ काम में जुटकर सीख गए। अब अगली पीढ़ियों को सिखा रहे हैं।
बोले बागवान
पारंपरिक फसलों की खेती के मुकाबले नर्सरी तैयार करने में अधिक मुनाफा है। इनकी मांग कई जिलों और प्रदेशों में है। - कृपाल सिंह, मनीगढ़ी
लंबे समय से इस क्षेत्र में संतरा, मौसमी आदि फलों की पौध तैयार की जा रही है। बाहरी जिलों और प्रांतों को पौध भेजी जाती है।- सोनप्रताप, मनीगढ़ी
इस क्षेत्र में बलुई दोमट मिट्टी है, जो नींबू वर्गीय पौधों के लिए काफी अनुकूल है। साथ ही वहां पानी का अच्छा साधन उपलब्ध है। दशकों से इन गांव में नर्सरी का काम किया जा रहा है। -डॉ. वीरेंद्र सिंह, उद्यान विज्ञान विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र, अवागढ़