आगरा के गैलाना रोड सिकंदरा स्थित वनखंडी महादेव मंदिर में दर्शन करने के लिए सावन के महीने में भक्तों का तांता लगता है। यहां शिवलिंग का कोई छोर नहीं है। इसे देखने दूर-दूर से भक्त आते हैं। पुजारी बिजेंद्र बाबा ने बताया कि मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है। भगवान भोले की शिवलिंग कसौटी के पत्थर की है, जिसका छोर आज तक किसी को भी नहीं मिला। हम से पहले जो यहां साधु महाराज थे। वह बताते थे कि यहां लक्खा नाम का बंजारा गाय को यमुना किनारे चराने के लिए आता था। तभी उसे यहां शिवलिंग मिला था। टीले पर स्थित शिवलिंग खोदने की कोशिश की लेकिन शिवलिंग छोर न मिलने पर वहीं मंदिर की स्थापना कर दी और वह पूजा करने लगा। जिसके बाद क्षेत्र के लोग भी शिवलिंग की पूजा करने लगे और मंदिर बन गया।
किवदंती है कि यहां बाबा भोले ने कई वर्षों तक सिर के बल तपस्या की थी, जिससे उनकी गर्दन टेढ़ी हो गई थी। बाबा घनश्याम ने भी यहीं भोले नाथ की सेवा व तपस्या की थी। वनखंडी महादेव मंदिर में रोजाना रूद्राभिषेक होते हैं। पूजा के बाद शिवलिंग पर शेषनाथ की आकृति भी दिखने लगती है। यहां सावन में भी भक्तों की भीड़ रहती है।