उच्च वर्ग से चंदा न लेने का किया था एलान
आंबेडकर का गुस्सा यहीं नहीं रुका। उन्होंने बताया कि दलित सांसद संसद में खुलकर बोल भी नहीं सकते, जबकि उस समय 30 दलित सांसद थे। उन्होंने सवाल उठाया, ये कैसी आज़ादी है जहां अछूत पेड़ नहीं काट सकते, कोई काम खुलकर नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि आंबेडकर भवन के निर्माण के लिए किसी उच्च वर्ग से चंदा नहीं लिया जाएगा। दलितों से उन्होंने दो टूक कहा था हाथ मत पसारो, खुद अपने पैरों पर खड़े हो।
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