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समरकंद-आगरा के बीच मजबूत होगी रिश्तों की डोर, तीन दिनों तक ताजनगरी में रहेंगे उज्बेकिस्तान के राजदूत

Mon, 15 Mar 2021 12:30 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • बाबर ने जोड़ा था समरकंद-आगरा का रिश्ता
  • सिस्टर सिटी के रूप में होगा फायदा
  • आगरा को लेकर उज्बेक सरकार सकारात्मक
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ताजमहल - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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समरकंद और आगरा के बीच दूरी 1718 किमी की है, लेकिन दोनों ही शहरों में स्थापत्य कला, संस्कृति और खानपान में समानताएं हैं। कभी समरकंद से आए मुगलों ने आगरा पर 330 साल तक राज किया था, लेकिन अब दोनों शहरों के बीच नया रिश्ता बन रहा है, जो सिस्टर सिटी की तरह से होगा। उज्बेकिस्तान के शहर समरकंद और मुगलिया राजधानी रहे आगरा के बीच रिश्तों की डोर एक बार फिर मजबूत होने वाली है। उज्बेकिस्तान के राजदूत तीन दिनों की आगरा यात्रा पर सोमवार को आ रहे हैं। वह 17 तारीख को नगर निगम में बैठक कर अक्तूबर 2018 में साइन किए गए एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) में तय किए गए बिंदुओं पर शहर के मेयर के साथ चर्चा करेंगे।
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उज्बेकिस्तान का शहर समरकंद पांचवीं सदी में विकसित हुआ और यह मुगल शासक बाबर की जन्मभूमि है। बाबर ने ही आगरा से मुगलिया शासन की शुरुआत की। तभी से समरकंद की स्थापत्य कला, चारबाग शैली आगरा ने अपना ली। यमुना नदी के किनारे 44 मुगल गार्डन समरकंद की चारबाग शैली में ही बनाए गए थे, जिनमें से अब 18 के अवशेष ही बाकी हैं। उज्बेकिस्तान के राजदूत फरहौद अरजीव की तीन दिनों की आगरा यात्रा के दौरान न केवल रिवरफ्रंट गार्डन, बल्कि शहर के विकास और पुरातत्व स्मारकों के संरक्षण पर भी चर्चा होगी। नगर निगम परिसर में 17 मार्च को मेयर नवीन जैन के साथ बैठक होनी है, जिसमें एमओयू को लेकर वार्ता होगी।
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बाबर ने जोड़ा था समरकंद-आगरा का रिश्ता
मुगल शासक बाबर का आगरा से गहरा रिश्ता रहा है। फतेहपुर सीकरी को यह नाम देने वाला बाबर ही था। राणा सांगा को फतेह करने के बाद उसने इसका नाम फतेहपुर सीकरी रख दिया। बाबर ने 1528 में आगरा में देश के पुराने मुगल गार्डन में से एक रामबाग का निर्माण भी कराया था। बाबर के अलावा उज्बेकिस्तान से कई मुगल आए। 330 साल तक राज करने के दौरान उन्होंने भारतीय खानपान, संस्कृति और लोक कलाएं भी सीख लीं थीं। 
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संवर सकता है चीनी का रोजा  
रामबाग के पास चीनी का रोजा स्मारक है, जो नीले रंग के ग्लेज्ड टाइल्स से बना है। ऐसे ही नीले रंग के टाइल्स समरकंद और बुखारा में लगे हैं। सिस्टर सिटी बनने के बाद उज्बेकिस्तान के पुरातत्वविदों की मदद से चीनी का रोजा नीले रंग के टाइल्स लगाकर संवारा जा सकता है। चीनी का रोजा में यह टाइल्स पूरी तरह से टूटकर निकल चुके हैं और स्मारक की दीवारों पर प्लास्टर ही बचा है।

सिस्टर सिटी के रूप में होगा फायदा
समरकंद और आगरा के बीच गहरे रिश्ते रहे हैं। दोनों शहरों के स्मारकों की स्थापत्य कला एक जैसी है। दोनों सिस्टर सिटी के रूप में एक साथ काम करें तो दोनों को ही फायदा होगा। इससे पर्यटन उद्योग को तो फायदा होगा ही, आपसी सहयोग से स्मारकों के संरक्षण, बागीचों की हालत भी बेहतर की जा सकती है। - शमशुद्दीन, अध्यक्ष, आगरा एप्रूव्ड गाइड एसोसिएशन

आगरा को लेकर उज्बेक सरकार सकारात्मक
नगर निगम परिसर में 17 मार्च को उज्बेकिस्तान के राजदूत के साथ एमओयू पर चर्चा करेंगे। उज्बेक सरकार आगरा को लेकर सकारात्मक है। हमारे बीच एमओयू हो चुका है। - नवीन जैन, मेयर
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