इलेक्ट्रिक वाहन के आने का इंतजार है। जीएसटी के अलग-अलग स्लैब की मुश्किलें हैं। वाहन की बीमा पॉलिसी की मियाद एक साल की जगह पांच साल करने का फर्क भी पड़ा है। -विशाल अग्रवाल, वाहिनी सुजुकी
व्यावसायिक वाहनों में मिले छूट
सीएनजी की गाड़ियां बढ़ रही हैं, लेकिन इस अनुपात में सीएनजी पंप कम हैं। सुविधाएं बढ़ाई नहीं जा रही हैं। ट्रक की खरीद पर भाड़ा नहीं निकल रहा है। व्यावसायिक वाहनों के मामले में छूट दी जानी चाहिए। -संजीव जैन, अशोक लीलेंड
फाइनेंस का चलन बढ़ा
अब लोग नगद खरीदने की जगह फाइनेंस कराने पर बल दे रहे हैं। लोग जरूरत के अनुसार गाड़ी खरीद कर रहे हैं। बैंकों की ब्याज दरें कम होनी चाहिए। - मनोज जादौन, रॉयल इनफील्ड
सरकार ऑटोमोबाइल सेक्टर को कुछ रियायतें दें। जीएसटी में कुछ और राहत मिले तो निश्चित ही व्यवसाय को फायदा होगा। त्योहारी सीजन में वाहनों की खरीद में इजाफा होने की उम्मीद है। -अभिषेक गुप्ता, लक्ष्मी ऑटो
स्क्रैप पॉलिसी से होगा सुधार
सरकार स्क्रैप पॉलिसी पर विचार कर रही है। ऑटो मोबाइल सेक्टर में गिरावट ज्यादा नहीं आई है। जब तक पुराने वाहनों से छुटकारा नहीं मिलेगा, नये वाहनों की खरीद नहीं बढ़ सकेगी। -दिनेश कुमार, प्रबंधक, केनरा बैंक
नई फीचर्स वाली गाड़ियों की डिमांड
छोटी कारों को छोड़ दें तो व्यावसायिक व एसयूवी गाड़ियों की खरीद बढ़ गई है। दिल्ली जैसे महानगरों की अपनी समस्याएं हैं, लेकिन नए फीचर्स वाली गाड़ी आने पर बाजार में उसकी डिमांड होती है। -वीके गोयल, पूर्व अध्यक्ष, बैंक अधिकारी संगठन
बैंक हर फेस्टिवल सीजन में कुछ न कुछ छूट और ऑफर देती हैं। वाहनों के फाइनेंस के स्तर में भी सुधार हुआ है। कैश क्रेडिट लिमिट कम की गई है। इससे ऑटो मोबाइल सेक्टर को भी फायदा होगा। - स्मृति सहाय, एसबीआई
कमजोर नहीं है अर्थव्यवस्था
अर्थव्यवस्था की अपनी चाल होती है। नगदी का चलन कम होने से अर्थव्यवस्था में कुछ गिरावट आ सकती है लेकिन देश की अर्थव्यवस्था कतई कमजोर नहीं है। -डॉ. श्वेता चौधरी, असिस्टेंट प्रोफेसर, सेठ पद्मचंद इंस्टीट्यूट
कम नहीं हुई क्रय शक्ति
व्यवसायियों को खुद रास्ते तलाश करने होंगे। लोगों की क्रय शक्ति कम नहीं हुई है। बाजार में किसी चीज की डिमांड कम नहीं हुई।
- शैलेंद्र सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, (इंजीनियरिंग संकाय) डॉ. आंबेडकर विश्वविद्यालय
व्यापारी सोच समझकर खरीदारी कर रहा
नौकरी पेशा ग्राहकों की खरीद में कोई कमी नहीं आई है। व्यवसायी सोच समझकर खरीदारी कर रहा है, क्योंकि उसे हर चीज का हिसाब देना है। आईटीआर भरना है। - मयंक पांडेय, केनरा बैंक