अमर उजाला की पहल ‘एक युद्ध, पटाखों के विरुद्ध’ के तहत
शनिवार को आयोजित वेबिनार में छात्र-छात्रों ने कहा कि हमें अपनी खुशी के लिए दूसरों को तकलीफ नहीं पहुंचानी चाहिए।
दिवाली से पहले ही शहर में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 से ऊपर पहुंच गया है, इसे 60 होना चाहिए। कोरोना की वजह से पहले से ही लोगों की सांसों पर संकट है। ऐसे में पटाखे जलाकर परेशानी और नहीं बढ़ानी चाहिए। यह अपील उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की है। अमर उजाला की पहल ‘एक युद्ध, पटाखों के विरुद्ध’ के तहत शनिवार को आयोजित वेबिनार में छात्र-छात्रों ने कहा कि हमें अपनी खुशी के लिए दूसरों को तकलीफ नहीं पहुंचानी चाहिए।
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वक्ताओं ने कहा कि संक्रमण से बचने के लिए विशेषज्ञ लोगों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का सुझाव दे रहे हैं। कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों को सांस संबंधी समस्या भी हो रही है, ऐसे में पटाखे जलाकर हवा में जहर घोलना उचित नहीं होगा।
खुद पटाखों से दूरी बनाएं, दूसरों को भी प्रेरित करें
दिवाली पर पटाखे जलाकर खुद के साथ तमाम लोगों को मुसीबत में डालेंगे। हम खुद तो पटाखों से दूरी बनाएं और आसपास के लोगों को भी प्रेरित करें। - गौरव शर्मा, शोधार्थी।
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प्रदूषण से बाहर निकलने में परेशानी हो रही
प्रदूषण के कारण घर से निकलने में परेशानी हो रही है। बुजुर्गों को भी सांस लेने में दिक्कत हो रही है। ऐसे में पटाखे जलाना लोगों को मुसीबत में डालना होगा। - अनंत चौधरी, आईईटी में बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र।
पटाखे जलाना धन की बर्बादी
प्रदूषण के स्तर को देखते हुए पटाखे जलाना उचित नहीं है। पटाखे जलाना धन की भी बर्बादी है। इन रुपयों से गरीबों व कोरोना संक्रमितों की मदद कर सकते हैं। - हर्षिता सोनी, सेंट जोंस कॉलेज में बीए तृतीय वर्ष की छात्रा।
...मनाएं बिना पटाखे वाली दिवाली
समाज के लिए संदेश है कि हर घर में उजाला हो, रात न आए कोई काली, आओ इस वर्ष हम मनाएं, बिना पटाखे वाली दिवाली। - प्रियंका कुशवाह, बीडी जैन कॉलेज में बीकॉम तृतीय वर्ष की छात्रा
....एक युद्ध पटाखों के विरुद्ध चलाएंगे
हम सभी को संकल्प लेना चाहिए कि दिवाली को दीपों से सजाएंगे, समाज को प्रदूषण मुक्त बनाएंगे, एक युद्ध पटाखों के विरुद्ध चलाएंगे। - प्रियांशी अग्रवाल, संत रामकृष्ण कन्या महाविद्यालय की छात्रा
बच्चों को पटाखे जलाने के दुष्प्रभाव बताएं
यदि बड़े लोग बच्चों को पटाखे जलाने के दुष्प्रभाव बताएं तो बच्चे जरूर समझेंगे। लॉकडाउन की अवधि में बच्चों ने अपने धैर्य का परिचय दिया है। - सैजल लैन, बीडी जैन कॉलेज में बीकॉम तृतीय वर्ष की छात्रा
दिवाली पर पटाखे जलाने के बजाय पौधे लगाएं
इस दिवाली हमें पटाखे जलाने के बजाय पौधे लगाने चाहिए। उनकी देखभाल करनी चाहिए। इस तरह से यह दिवाली हमारे लिए यादगार बन जाएगी। - राहुल राजपूत, आगरा कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष के छात्र
आगरा में भी पटाखों पर लगे प्रतिबंध: मनीष
ताजनगरी की हवा दिवाली से पहले ही दमघोंटू हो चुकी है। दिल्ली की तर्ज पर आगरा में भी प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए पटाखों पर प्रतिबंध लगाया जाए। जागो आगरा जागो के संस्थापक मनीष अग्रवाल ने जिला प्रशासन से आतिशबाजी पर रोक का आदेश जारी करने की मांग की।
मनीष अग्रवाल ने कहा कि ताजनगरी में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर है। धूल के कणों की तादाद लगातार बढ़ रही है, ऐसे में यदि पटाखे भी जलेंगे तो हालात बेकाबू हो जाएंगे। जिन लोगों को सांस की तकलीफ है, उनके लिए शहर में रहना ही मुश्किल हो जाएगा। वैसे भी कोरोना संक्रमण में सांस लेने से संबंधित मुश्किल वालों के लिए सर्वाधिक खतरा है। इन हालातों को देखते हुए जिला प्रशासन को अविलंब पटाखों की बिक्त्रस्ी एवं जलाने पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।