अमर उजाला में छपी खबर के बाद मथुरा जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। घरों पर संडे मनाने वाले अधिकारी जेसीबी लेकर दौड़ पड़े। मगोर्रा क्षेत्र और बलदेव में रजबहा की सफाई कराई गई। अफसर जहां भी जाते वहीं का फोटो अपने आला अधिकारियों को भेज देते। डीएम ने भी सिंचाई विभाग के अफसरों को लताड़ लगाई। 12 नवंबर को नहरों से पानी छोड़ा जाएगा।
नहरों की सफाई के नाम पर होने वाले खेल का खुलासा अमर उजाला ने किया था। 11 नवंबर के अंक में पेज संख्या 6 पर कागजों में ही हो गई नहरों की सिल्ट सफाई खबर प्रकाशित की थी। इस खबर से हड़कंप मच गया। जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र ने सिंचाई अफसरों को लताड़ लगाई और कहा कि नहरों की सफाई करने के बाद उन्हें रिपोर्ट दी जाए।
डीएम की सख्ती के बाद अभी तक ठेकेदारों से दोस्ती निभाने वाले सिंचाई विभाग के अधिकारी जेसीबी लेकर दौड़ पड़े। रविवार सुबह ही फोडर रजबहा, महावन रजबहा पर जेसीबी पहुंच गई। यहां किनारे से लेकर बीच तक की सफाई कराई गई।
शासन तक पहुंची सिंचाई अफसरों की शिकायतें
किसान राजकुमार तोमर, देवेंद्र रघुवंशी, मोहन सिंह, हाकिम सिंह, बुद्धा सिंह प्रधान, कृष्ण गोपाल ने डीएम से टेल तक सिल्ट सफाई कार्य का निरीक्षण कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि अब दो दिन बाद नहरों में पानी आ जाएगा और सिल्ट सफाई में घोटाले पर पर्दा डल जाएगा।
नहरों की सफाई के नाम पर बड़ी कमाई की जा रही है। सिंचाई विभाग के चार डिवीजनों में 3.5 करोड़ से 900 किलोमीटर से अधिक नहर, रजबहा तथा अल्पिका(बंबी) की सफाई को डेढ़ महीने पहले टेंडर निकाल कर काम शुरू किया गया।
इसमें 90 से अधिक रजबहा, अल्पिका व माइनर ऐसे हैं जहां नाम मात्र की भी सिल्ट नहीं उठाई गई, जबकि टेंडर में शामिल हैं। कुछ में सड़क किनारे एक दो किमी तक सफाई कराकर छोड़ दी। जब इस संबंध में प्रदेश सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा से बात की गई तो उनका कहना था कि जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।