परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार पुंढीर ने बताया कि डग्गामार वाहनों से रोडवेज को रोजाना करीब 26 लाख का घाटा हो रहा है। एक सप्ताह पहले भी आरटीओ को इस तरह की परमिट शर्तों को उल्लंघन करने वाली और डग्गामार बसों के खिलाफ कार्रवाई करने का पत्र लिखा था। अब तक कार्रवाई नहीं हुई है।
आरटीओ (प्रवर्तन) अनिल कुमार ने बताया कि ट्रेनों के कम चलने के कारण प्राइवेट और डग्गामार वाहन तेजी से बढ़े हैं। इनकी धरपकड़ भी की जा रही है। प्रवर्तन दलों ने एक सप्ताह में सात बसें पकड़ी, लेकिन थानों में रखने की जगह नहीं होने के कारण सीज नहीं कर पाते हैं। केवल चालान करके छोड़ रहे हैं।
एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने कहा कि डग्गामार वाहनों को सीज करने के लिए पुलिस की ओर से कभी भी ऐसा नहीं कहा गया है कि कि थानों में जगह नहीं है। जो भी गाड़ी सीज होती हैं। उसे रखा जाता है। जितनी भी डग्गामार बसें सीज की जाएंगी। सबको को रखने का इंतजाम किया जाएगा।
हादसा हो जाए तो मुआवजा मुश्किल
आरटीओ के आरआई सुधीर कुमार ने बताया कि डग्गामार या आउट ऑफ परमिट गाड़ी से हादसा होने पर अगर यात्री घायल हो तो उसे और अगर मृत्यु हो जाए तो उसके परिवारीजनों को कोर्ट जाना पड़ता है। रोडवेज में सिर्फ टिकट होने से ही मुआवजा मिल जाता है।