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एक युद्ध पटाखों के विरुद्धः पटाखे न फोड़ें, न मित्रों को फोड़ने दें, पर्यावरण रक्षा की अपील

Tue, 03 Nov 2020 12:15 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा

सार

ऐसे में भला युवा और बच्चे भी कैसे पीछे रहने वाले हैं। ऐसे में समाज की प्रबुद्ध महिला वर्ग ने युवाओं और बच्चों से पर्यावरण की रक्षा के लिए के लिए उन्हें पटाखे न फोड़ने की अपील करते हुए अमर उजाला की मुहिम का साथ देने का आह्वान किया है। 
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एक युद्ध पटाखों के विरुद्धः पटाखे न फोड़ने की अपील - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अब दीपावली के कुछ ही दिन बचे हैं। लोग इस पर्व को अपने-अपने तरीके से मनाने की तैयारियों में जुट गए हैं। ऐसे में भला युवा और बच्चे भी कैसे पीछे रहने वाले हैं। ऐसे में समाज की प्रबुद्ध महिला वर्ग ने युवाओं और बच्चों से पर्यावरण की रक्षा के लिए के लिए उन्हें पटाखे न फोड़ने की अपील करते हुए अमर उजाला की मुहिम का साथ देने का आह्वान किया है। 
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मानव एवं पर्यावरण के बीच हमेशा एक अटूट संबंध सदियों पुराना रहा है। आदि काल से ही पर्यावरण के साथ-साथ यह संबंध जीवन मूल्यों पर आधारित रहा है लेकिन आज के वर्तमान परिपेक्ष्य में जिस तरीके से पश्चिमीकरण बढ़ता जा रहा है। अब दीपावली के उत्सव पर लोग पटाखों का उपयोग करते हैं, जिससे वायु में गंधक की धुंध छा जाती है। इसके कारण सांस लेने में कठिनाई होने लगती है। मेरा कहना है कि हम एक बुद्धिजीवी वर्ग हैं और हमें इन सबसे बचना चाहिए। साथ ही हमें पर्यावरण की सुरक्षा के लिए प्रयास करने चाहिए। दीपावली पर यह संकल्प लेना चाहिए कि हम न तो स्वयं पटाखे लाएंगे, न ही अपने मित्रों या बच्चों को पटाखे फोड़ने देंगे। - डॉ. सीमा मोरवाल, समाजसेविका।

प्यारे बच्चों दीवाली पर पटाखे फोड़ना आपको बहुत पसंद है और ये पटाखे वायु को बहुत प्रदूषित करते हैं। आप ये भी जानते हो, लेकिन आज आपको हमसे एक वादा करना है कि इस बार आप दीपावली पर पटाखे नहीं फोड़ेंगे और वायु को प्रदूषित होने से बचाएंगे। - अनुराधा सक्सेना अध्यापिका।
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पटाखों से ध्वनि प्रदूषण बहुत अधिक मात्रा में होता है। इसके साथ-साथ वायुमंडल में एक धुंध छा जाती है, जिससे बुजुर्गों को कठिनाई का अनुभव होता है। हमें दिवाली पर संकल्प लेना चाहिए और बच्चों को समझाना चाहिए कि जिन रुपयों से वे पटाखे फोड़ेंगे, उन रुपयों से हम एक अनमोल खुशी भी बांट सकते हैं। गरीब बच्चों में उन रुपयों की मिठाई और कुछ खिलौने बांटे जाएं। - किरणलता, अध्यापिका।

दीपावली खुशियां बांटने का त्योहार है। साथ ही अपने आसपास का वातावरण साफ और शुद्ध रखना आवश्यक होता है। ऐसे में हम पटाखे जलाकर स्वयं वायु प्रदूषण के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण भी फैलाते हैं। रोगी, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को हमेशा इन पटाखों को जलाने के बाद सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। ऐसे में हमें अपने धन को बरबाद नहीं करना चाहिए। - वंदना सिसौदिया, गृहिणी।

भगवान श्रीकृष्ण ने हमेशा पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का ही संदेश मानव को दिया। ऐसे में हम ब्रजवासियों का भी दायित्व बनता है कि हम भी अपने आराध्य के बताए मार्ग पर चलें। हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम न तो स्वयं पटाखे लाएंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। पटाखों के स्थान पर हम अपने घर के आस-पास दीप जलाएं और सुंदर पेड़ लगाएं। - डॉ. लक्ष्मी गौतम, समाजसेविका।
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