'सरकार समय से बिजली-पानी तो दिलाए'
किरावली के कुकथला गांव में बैठ किसानों में खेती पर ही चर्चा चल रही थी। बिजली कटौती और नहरों में पानी नहीं आने से परेशान किसानों ने कहा कि कानून को लेकर हंगामा मचा है। सरकार कुछ सुनने को तैयार नहीं है। सरकार पहले बिजली-पानी तो समय से उपलब्ध कराए।
किसान रामखिलाड़ी कुशवाह ने कहा कि सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 1857 रुपये घोषित किया है। पर, धान 1400 रुपये में ही बिक रहा है। गांव नागर निवासी श्यामवीर सिंह ने कहा कि सिंचाई के लिए नहरों मे पानी नहीं आया। इस ओर सरकार का ध्यान नहीं है। किसान गजेंद्र सिंह इंदौलिया ने साफ कहा कि इस कानून से कुछ नहीं होने वाला। पहले सरकर किसानों को समय से सिंचाई का पानी, बिजली उपलब्ध कराए।
'राजनीति से हमें ना मतलब, हमें तो खेती करिवे ते काम'
किसान बिल को लेकर एक और जहां पूरे देश में बवाल मचा हुआ है ।वहीं फतेहाबाद क्षेत्र में किसान अपनी खेती में मशगूल है। किसानों का कहना है कि उन्हें कानून के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्हें अपनी खेती से मतलब है। ग्राम गढ़ी सराय निवासी किसान चंदन सिंह बोले कि राजनीति से हमें ना मतलब हमें तो अपनी खेती ते काम है।
ग्राम कृपाल पुरा के किसान सुरेश चंद्र बोले कि आलू की पैदावार में अच्छा खसा मुनाफा भयों हतो अब दुबारा फिर हमने आलू करो है ,हमें किसान बिल सो कोऊ मतलब नहीं। इस दौरान डालचंद, भगवान सिंह ,सुरेश चंद, रमेश, महेंद्र आदि भी कृषि कानून के बारे में कुछ नहीं बता सके।
'समर्थन मूल्य के बगैर कोई फायदा नहीं'
एत्मादपुर तहसील क्षेत्र के नयाबास गांव में शुक्रवार को गुनगुनी धूप के बीच आलू के खेत के किनारे बैठे किसान बातें कर रहे थे। उनके बीच किसान आंदोलन पर ही बातें हो रही थी। किसानों का कहना है कि आंदोलन के लिए सरकार ने ही मजबूर कर रखा है। ऐसे कानून बना देने से कोई फायदा नहीं है। किसान को समर्थन मूल्य पर सबसे अधिक ध्यान देना होगा, तभी किसानों की तरक्की संभव है।