ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के लेफ्टिनेंट गवर्नर सर जेम्स थॉमसन के नाम पर वर्ष 1854 में स्थापित हुआ था थॉमसन स्कूल। तब यहां ब्रिटिश सैन्य चिकित्सक प्रैक्टिस करते थे। बाद में मेडिकल स्कूल से संबद्ध होने पर इसका नाम थॉमसन हॉस्पिटल हो गया। 1857 में पहली बार भारतीय डॉक्टरों का बैच पास आउट हुआ। पहले प्रधानाचार्य सर्जन डॉ. जॉन मरे थे। 1872 में सिविलियन छात्रों का एलएमपी कोर्स में प्रवेश हुआ। 1939 में आगरा मेडिकल स्कूल पूरी तरह से मेडिकल कॉलेज के रूप में स्थापित हुआ। एमबीबीएस का पहला बैच 1944 में पास आउट हुआ। आगरा विश्वविद्यालय से इनको डिग्री मिली। 1947 में उत्तर प्रदेश की पहली राज्यपाल सरोजनी नायडू के नाम पर इसका नाम सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज रखा गया। 1948 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और जनरल मेडिकल काउंसिल ऑफ ग्रेट ब्रिटेन से संबद्ध हुआ।
44 एकड़ में फैलेगा मिनी एम्स
वर्ष 2022 में इंटीग्रेटेड प्लान तैयार हुआ है, इसमें एसएन की 24 एकड़ और लेडी लायल की 20 एकड़ जमीन को शामिल किया है। इसमें 160 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें पुरानी 40 से अधिक छोटी-बड़ी इमारत और भवनों को तोड़कर नए सात ब्लाॅक बनेंगे। इनकी छत से कनेक्टविटी होगी, जिससे मरीजों को सीधे विभागों में शिफ्ट किया जा सके। मॉड्युलर ऑपरेशन थिएटर, वार्ड और अन्य सुविधाएं होंगी। इससे मरीज को कैंसर, किडनी, लिवर, हृदय रोग समेत अन्य गंभीर मर्ज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
साल में पांच लाख मरीज पाते इलाज
एसएन मेडिकल कॉलेज में हर साल पांच लाख मरीज इलाज पाते हैं। इसमें उत्तर प्रदेश के 35 जिलों के अलावा राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश तक के मरीज आते हैं। आगरा से गुजरने वाले यमुना एक्सप्रेसवे और लखनऊ एक्सप्रेसवे के कारण इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है।
हर महीने 1.25 लाख मरीज पाते हैं इलाज
जिला अस्पताल में हर महीने 1.25 लाख मरीज इलाज पाते हैं। इसमें हर महीने 45 हजार नए मरीज इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अशोक अग्रवाल ने बताया कि एक अक्तूबर, 1959 को तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री हुकुम सिंह ने इसका उद्घाटन किया था। अस्पताल 5.96 एकड़ में फैला हुआ है। यहां आसपास के जिलों के मरीज भी इलाज कराने आते हैं। अब अस्पताल में 138 बेड की क्षमता है। 42 डॉक्टर और 53 स्टाफ नर्स हैं। कोरोना वायरस महामारी में सबसे पहले जिला अस्पताल में ही कोविड वार्ड खोला गया था। यहां पर ही नमूने लेने और इलाज की सुविधा की गई थी। इसके बाद एसएन मेडिकल कॉलेज और अन्य अस्पतालों में व्यवस्था की गईं। अभी जिला अस्पताल में 500 लीटर प्रति मिनट की क्षमता से आक्सीजन बनाने वाला प्लांट लगा है। ब्यूरो
1883 में महिला अस्पताल स्थापित हुआ
1883 में लेडी लॉयल अस्पताल की स्थापना हुई। उस वक्त इसे लेडी लॉयल डूरिन हॉस्पिटल बोला जाता था। इसमें छात्राओं को चिकित्सकीय पढ़ाई कराई जाती थी। महिला डॉक्टरों का पहला बैच 1886 में पास आउट हुआ। ये एसएन परिसर से सटा हुआ है। इसका परिसर करीब 20 एकड़ से अधिक जमीन पर बना हुआ है।
मरीज को दूसरे शहर नहीं जाना पड़ेगा
एसएन मेडिकल कॉलेज ताजनगरी के चिकित्सकीय सेवाओं की रीढ़ है। अभी मिनी एम्स की तर्ज पर इसका विकास होगा। इससे कई गंभीर रोगों के इलाज के लिए मरीजों को दूसरे शहर में नहीं जाना होगा। एसएन में ही निशुल्क इलाज मिलेगा।
-डॉ. प्रशांत गुप्ता, प्राचार्य
विश्व स्तरीय कॉलेज हो जाएगा एसएन
एसएन मेडिकल कॉलेज अब तरक्की की ओर चल रहा है। सुपर स्पेशियलिटी विंग बनने के बाद महा योजना इंटीग्रेटेड पूरा होने के बाद ये विश्व स्तरीय कॉलेज हो जाएगा। जनप्रतिनिधि और सरकार का विशेष योगदान है। -डॉ. सुनील शर्मा, अध्यक्ष, आगरा सर्जंस एसोसिएशन
एसएन का छात्र होना गौरव की बात
एसएन मेडिकल कॉलेज देशभर में विख्यात है। इसने देश-दुनिया को नामीगिरामी चिकित्सक दिए हैं, जो अपनी काबलियत पर दुनिया भर में मरीज सेवा कर रहे हैं। इसका छात्र होना ही अपने आप में गौरवान्वित महसूस कराता है। -डॉ. राजीव उपाध्याय, निवर्तमान अध्यक्ष आईएमए
आसपास के मरीजों के लिए फायदेमंद
गरीबों के इलाज के लिए एसएन मेडिकल कॉलेज मुख्य अस्पताल बना हुआ है। यहां की पढ़ाई के साथ एतिहासिक कॉलेज होना भी ताजनगरी के मान को बढ़ाता है। इसका मिनी एम्स की तर्ज पर विकसित होना आसपास के राज्यों के लिए भी फायदेमंद होगा। -डॉ. ओपी यादव, अध्यक्ष आईएमए
जिला अस्पताल इलाज का बड़ा केंद्र
जिला अस्पताल इलाज का बड़ा केंद्र बन गया है। यहां निशुल्क पैथोलॉजी जांच, एक्सरे, अल्ट्रासाउंट, डायलिसिस की सुविधा है। निशुल्क डायलिसिस से किडनी मरीजों को राहत मिल रही है। बेहतर सेवाओं के चलते मरीज बढ़ रहे हैं। -डॉ. अशोक अग्रवाल, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल
तब मुख्यमंत्री ऑपरेशन के लिए आए थे एसएन
साल पहले एसएन मेडिकल कॉलेज पूरे उत्तर भारत में अपनी चिकित्सा सेवाओं के लिए इतना प्रसिद्ध था कि प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी अपना ऑपरेशन कराने के लिए आगरा आए। तीन दिन तक पूरी सरकार आगरा में बनी रही। मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी लखनऊ की जगह आगरा के मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन कराने के लिए आए तो प्रदेश सरकार के मंत्री, प्रमुख सचिव आदि तीन दिन तक यहीं बने रहे। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उस दौर में एसएन मेडिकल कॉलेज को काफी वित्तीय मदद भी मिली।
168 साल का एसएन...अब बनेगा मिनी एम्स
1854 में थॉमसन स्कूल के नाम से पड़ी नींव, अब देश के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में है शामिल
160 करोड़ रुपये की लागत से एसएन-लेडी लॉयल परिसर को मिलाकर बनेगा मिनी एम्स
24 एकड़ में फैला है एसएन मेडिकल कॉलेज
128 सीटें हैं एमबीबीएस की
970 बेड की है क्षमता
25 विभाग