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अमर उजाला ने उत्कर्ष के 70वें वर्ष पर ब्रज के 17 रत्नों का किया सम्मान

Thu, 19 Apr 2018 12:17 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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मिला सम्मान - फोटो : अमर उजाला
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गौरवशाली 70 साल का पड़ाव पार करने के सुनहरे मौके पर अमर उजाला ने ब्रज के 17 रत्नों का सम्मान किया। चिकित्सा, साहित्य, सामाजिक क्षेत्र, उद्योग, कला आदि क्षेत्र की सम्मानित होने वाली वह शख्सियतें थीं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में न सिर्फ ब्रज बल्कि देश का नाम रोशन किया है। 

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इनमें से पांच विभूतियों को अमर उजाला लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड और 12 को अमर उजाला गौरव सम्मान दिया गया। शहर के प्रतिष्ठित लोग गौरव से भरे इस समारोह के गवाह बने। बुधवार को होटल जेपी पैलेस में अमर उजाला की ओर से गौरव सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया था। 

पद्मश्री से सम्मानित आगरा के डा. डीके हाजरा और मथुरा के मोहन स्वरूप भाटिया, यशभारती से सम्मानित कवि सोम ठाकुर और आगरा के वरिष्ठ चिकित्सक डा. आरएस पारीक और डा. एमसी गुप्ता को उनके योगदान के लिए अमर उजाला लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया। 
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इनके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में अहम योगदान के लिए आगरा के नौ, मथुरा के दो और फिरोजाबाद की एक विभूति को अमर उजाला गौरव सम्मान दिया गया।

कार्यक्रम स्थल पर अतिथि - फोटो : अमर उजाला
मुख्य अथिति नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के न्यायमूर्ति आरएस राठौर, विशिष्ट अतिथि अनुसूचित जाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. रामशंकर कठेरिया व अमर उजाला के निदेशक प्रबल घोषाल ने शॉल ओढ़ाकर, स्मृति चिह्न और अभिनंदन पत्र देकर सम्मान किया। 

इस मौके पर न्यायमूर्ति आरएस राठौर ने कहा कि कोई खबर चाहे कहीं सुनी हो या फिर कहीं पढ़ी हो, जब तक अमर उजाला में उसे नहीं देख लेते तब तक उस पर भरोसा नहीं होता। 

समाज के अग्रणी लोगों को आगे लाकर सराहनीय कार्य किया है। डा. रामशंकर कठेरिया ने कहा कि अमर उजाला पढ़े बिना मन नहीं भरता। सोशल मीडिया ने अन्य मीडिया को चुनौती तो दी है लेकिन अखबारों की साख बनी हुई है। 

डा. रंजना बंसल, डा. जयदीप मल्होत्रा डा. लक्ष्मी सिंह चौहान, पूरन डाबर, डा. प्रणवीर सिंह चौहान, दयाल सरन, पीके झिंदल, श्रीभगवान अग्रवाल, सुनील विकल, बांके बिहारी अग्रवाल, अनंत स्वरूप वाजपेयी और विजय गोयल को अमर उजाला गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। वहीं अमर उजाला लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से डा. आरएस पारीक, डा. एमसी गुप्ता, डा. डीके हाजरा, मोहन स्वरूप भाटिया और सोम ठाकुर को सम्मानित किया गया। 
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जानें सम्मान पाने वालों के बारे में

विचार रख्ाते वक्ता - फोटो : अमर उजाला
मोहनस्वरूप भाटिया
ज्ञानदीप शिक्षा भारती स्कूल के सचिव पद्मश्री भाटिया ब्रज की लोक संस्कृति और लोक कलाओं से जुड़े रहे हैं। उन्हें यूपी सरकार सम्मानित किया, साथ ही हर साल राजस्थान के श्रीनाथ समिति उन्हें सम्मानित करती है। इस साल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद्मश्री से नवाजा। 

डा. डीके हाजरा
एसएन मेडिकल कालेज में मेडिसिन विभागाध्यक्ष रह चुके डा. डीके हाजरा को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। न्यूक्लियर मेडिसिन के तहत उनकी थायरॉयड की जांच के लिए थायरॉयड स्टुमुलेटिंग हारमोन (टीएसएच) परीक्षण की खोज काफी महत्वपूर्ण है। इसके लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। डा. हाजरा न्यूक्लियर मेडिसिन सोसाइटी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे हैं। 

डा. आरएस पारीक
वरिष्ठ होम्योपैथिक फिजिशियन डा. आरएस पारीक को होम्योपैथी के क्षेत्र में अपना रिसर्च पेपर 25 देशों में प्रस्तुत कर चुके हैं। दुनिया के 700 से ज्यादा परास्नातक चिकित्सकों को पढ़ाया है। उनकी पुस्तक होम्योपैथी फॉर एक्यूट्स एंड इमरजेंसीज में उनकी मेहनत का निचोड़ है। इसमें ब्रेन हैमरेज, बेहोशी, उल्टी दस्त, मानसिक विकार, किडनी व लीवर से संबंधित बीमारी व जोड़ों में दर्द से निजात के तरीके बताए गए हैं। होम्योपैथी के क्षेत्र में पूरी दुनिया में बिकने वाली यह पुस्तक बेस्ट सेलर रही है।
 
डा. लक्ष्मी गौतम
डा. लक्ष्मी गौतम कनकधारा फाउंडेशन की संस्थापिका हैं और आईओपी वृंदावन इतिहास विभाग में एसो.प्रोफेसर रही हैं।वृंदावन मे रह रही निराश्रित महिलाओं और विधवा माताओं के सर्वेक्षण मे अहम भूमिका निभाए जाने पर नाल्सा द्वारा प्रशस्ति पत्र 2013 में रिलायंस फाउन्डेशन द्वारा रीयल हीरो अवार्ड दिया गया। 2013 में आधार फाउंडेशन पंजाब द्वारा नारी शक्ति अवार्ड, 2014 ऐसौचैम लेडीलीग इटंरनेशनल अवार्ड, 2014 जीजाबाई अवार्ड, 2015 देश से चुनी गई 6 महिलाओं मे नारी शक्ति पुरस्कार राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा दिया गया। 8 मार्च 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सम्मानित किया गया। 

सोम ठाकुर 
हिंदी भाषा को संबद्ध करने में कवि सोम ठाकुर का अग्रणी स्थान है। 5 मार्च 1934 को जन्मे सोम ठाकुर ब्रज भाषा में भी खूब लिखा है। हिंदी में एमए करने के बाद पहले आगरा कालेज और फिर सेंट जोंस कालेज में अध्यापन कार्य से जुड़ रहे। फिर उन्होंने अमेरिका के 29 शहरों में अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति की शाखाएं शुरू कीं। मॉरीशस सरकार ने उन्हें अपने यहां हिंदी को संबद्ध करने के लिए आमंत्रित किया। 2006 में यश भारती सम्मान और 2009 में दुष्यंत कुमार अलंकरण सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान और पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

डा. जयदीप मल्होत्रा, अध्यक्ष फोग्सी
आईवीएफ विशेषज्ञ और रेनबो हास्पीटल की एमडी डा. जयदीप मल्होत्रा फेडरेशन आफ आब्सटेट्रिक्स एंड गाइनिकोलोजी की अध्यक्ष हैं। देश की श्रेष्ठ चिकित्सकों में एक डा. मल्होत्रा के इलाज के बाद आईवीएफ के जरिए भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के देशों में हजारों बच्चों की किलकारी गूंजी है। नेपाल में उनके जरिए 400 परिवारों को बच्चों की खुशी मिली है। बांझपन के इलाज में उन्होंने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए वह कई संगठनों के साथ मिलकर अभूतपूर्व कार्य कर रही हैं।

डा. रंजना बंसल,
एसएन मेडिकल कालेज से एमबीबीएस और अमेरिका से गायनिक में एमएस की डिग्री लेने वाली डा. रंजना बंसल चिकित्सा के साथ शहर के उद्योग जगत का बड़ा नाम है। टाटा मोटर्स की 9 जिलों में डीलरशिप उनके पास है। 1989 में वह टाटा मोटर्स के साथ कारोबार से जुड़ी। वह 50 बेड का अस्पताल अशोक श्रुति मेमोरियल हास्पीटल नुनिहाई में संचालित कर रही हैं। समाज के कमजोर वर्ग के इलाज और आपरेशन में जुटी हैं। पेंटिंग, इंटीरियर डिजाइनिंग के साथ पर्यावरण के लिए वह कई सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर रचनात्मक काम कर रही हैं।

पूरन डावर, अध्यक्ष एफमेक
काउंसिल आफ लेदर एक्सपोर्ट के नार्थ इंडिया चेयरमैन पूरन डावर ने आगरा के जूता निर्यातकों को संगठित कर आगरा फुटवियर एंड मैन्यूफैक्चरर्स चैंबर की स्थापना की। एफमेक के जरिए उन्होंने आगरा के जूता उद्योग में जान फूंकने के लिए इंटरनेशनल लेदर फेयर शो ‘मीट एट आगरा’ शुरू किया जिसमें दुनिया भर के जूता कारोबारी हिस्सा लेते हैं। डावर ग्रुप के चेयरमैन पूरन डावर इन्क्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन, आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन समेत कई संस्थाओं के साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़कर शहर के विकास में योगदान दे रहे हैं।

दयाल सरन एडवोकेट
60 सालों से शहर में टैक्सेशन के अधिवक्ता के तौर पर उन्होंने औद्योगिक संगठनों की पैरवी की। शहर के अधिवक्ताओं में वह जाना पहचाना नाम है, जिन्होंने शहर के औद्योगिक विकास के साथ कई सामाजिक संगठनों, औद्योगिक और व्यापारिक संगठनों के साथ काम किया। टैक्सेशन बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कई पहल की। टैक्स अधिवक्ताओं की मुश्किलें दूर करने के साथ टैक्स कानूनों के प्रति जागरूक किया। लायंस क्ल्ब, आगरा क्लब, सेंट्रल सत्संगीज वेलफेयर सोसायटी, रॉमसंस चैरिटेबल ट्रस्ट आदि के जरिए वह समाजसेवा से जुड़े हैं। 

डा. प्रणवीर चौहान
होम्योपैथिक चिकित्सक, पत्रकार, साहित्यकार एवं समाजसेवी डा. प्रणवीर सिंह चौहान का साहित्य में विशेष योगदान रहा है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व पूर्व विधायक ठाकुर उल्फत सिंह चौहान के पुत्र डा. प्रणवीर 1200 से अधिक विभिन्न विषयों पर लेख लिख चुके हैं। 600 से अधिक वार्ताएं आकाशवाणी के दिल्ली, लखनऊ, मथुरा और आगरा से प्रसारित हो चुकी हैं। 14 से अधिक अभिनंदन एवं स्मृति-ग्रंथों का संपादन कर चुके हैं। डा. प्रणवीर चौहान को 27 पुरस्कार, मानद उपाधि एवं सम्मान मिल चुके हैं।

सुनील विकल
सामाजिक कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाने वाले सुनील विकल क्षेत्र बजाजा कमेटी के अध्यक्ष हैं। इससे पहले वह महामंत्री भी रहे हैं। अग्रवाल समाज की सशक्त संस्था अग्रवाल संगठन कमला नगर का विगत 30 साल से निरंतर सफल संचालन कर रहे हैं। विविध सामाजिक, शैक्षिक, धार्मिक एवं व्यावसायिक संगठनों में सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रहे हैं। सुनील विकल पांच बार विधायक रह चुके सत्यप्रकाश विकल के पुत्र हैं। विद्यार्थी परिषद में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए कई बार जेल यात्राएं भी कीं। 

विजय गोयल
विपरीत परिस्थितियों में फोटोग्राफी के माध्यम से हालातों से लोगों को रूबरू कराने वाले विजय गोयल सामाजिक क्षेत्र में काफी सक्रिय हैं। वर्ष 1971 में अमर उजाला के लिए डबरा में डाकू कल्याण सिंह के समर्पण की कवरेज से उनका यह सफर शुरू हुआ। इसके बाद उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर डाकुओं से जुड़ी गतिविधियों पर उनकी नजर रही। फूलनदेवी के समर्पण के घटनाक्रम को भी उन्होंने अपने कैमरे में कैद किया। भोपाल गैस त्रासदी में हवा में घुली जहरीली गैस के बीच विजय गोयल ने वहां के हालातों को अपने कैमरे में कैद किया। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े हुए हैं। 

अनंत स्वरूप वाजपेयी
अनंत स्वरूप वाजपेयी देशभक्त दस साल तक अमर उजाला जुडे़ रहे। अनंत स्वरूप वाजपेयी देशभक्त पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रतिष्ठित हैं। अमर उजाला के अलावा उन्होंने विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के लिए भी लेखन का काम किया है। इन्होंने खुद भी कई पत्रिका और पुस्तकों का संपादन किया है। इसके अलावा उनका नाम शिक्षा क्षेत्र में भी बडे़ आदर के साथ लिया जाता है। शहर के प्रतिष्ठित आवासीय शिक्षण संस्थान अमरनाथ विद्या आश्रम को तैयार करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। 

पीके झिंदल 
फिरोजाबाद में पीके झिंदल की पहचान एक उद्यमी के साथ-साथ प्रमुख समाजसेवी के रूप में है। चूड़ी गोदाम और चूड़ी कारखाना का संचालन करते उन्होंने वर्ष 2001 में समाजसेवा के क्षेत्र में कदम रखा। आगरा की क्षेत्र बजाजा कमेटी के कार्यों से प्रभावित होकर उन्होंने शहर में सबसे पहले किसी भी व्यक्ति के निधन पर अंतिम संस्कार का पूरा सामान लोगों को निशुल्क उपलब्ध कराने का कार्य शुरू किया। 2010 में डायलेसिस की सुविधा शुरू की गई।

डा. एमसी गुप्ता
प्रख्यात चिकित्सों की बात हो तो उसमें डा. एमसी गुप्ता का नाम प्रमुखता से आता है। फिजिशयन के तौर पर इन्होंने अपनी अलग पहचान स्थापित की है। चिकित्सा ही नहीं, सामाजिक क्षेत्र में भी उन्होंने सराहनीय कार्य किए हैं। वर्ष 1957 में एमबीबीएस और 1960 में एमडी करने के बाद इग्लैंड चले गए। यहां जब लौटकर आए तो अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कालेज में अध्यापन कार्य किया। वर्ष 1974 में उन्होंने अलीगढ़ छोड़ दिया और आगरा में प्रैक्टिस शुरू की। विकलांग सहायता संस्था से जुड़कर दिव्यांगों की मदद में आगे रहते हैं।
 
श्रीभगवान अग्रवाल
आगरा की 125 साल पुरानी ऐतिहासिक रामलीला से 70 साल से जुड़े हैं। 32 साल से वह श्रीराम लीला कमेटी में मंत्री पद पर हैं। शहर की सांस्कृतिक विरासत को उन्होंने इन बरसों में भव्य रूप प्रदान किया है। रामलीला के साथ उन्होंने जनकपुरी आयोजन में भी अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी की है। शहर की कई अन्य सामाजिक गतिविधियों से वह जुड़े रहे हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा और समाज के उन्नयन में उनकी भूमिका रही है। कई सालों से वह आंखों के नि:शुल्क आपरेशन कराते रहे हैं। 

बांकेलाल माहेश्वरी
गर्मियों में शीतल जल के लिए शहर में जगह जगह प्याऊ लगाकर श्रीनाथ जी नि:शुल्क जल सेवा लोगों के दिल में जगह बना चुकी है। जल सेवा को लंबे समय से बरकरार रखे हुए बांकेलाल माहेश्वरी ने एक रेल दुर्घटना के बाद जल सेवा शुरू की जो अब तक अनवरत चल रही है। सर्दियों में वह श्रीनाथ जी के नाम से रैन बसेरे लगा कर गरीबों, असहायों की मदद कर रहे हैं। सामाजिक क्षेत्र में उनके कार्यों से कई अन्य संगठनों ने प्रेरणा ली है, जिसके बाद शहर में गर्मियों में पेयजल सेवा और सर्दियों में रैन बसेरे शुरू हुए। 
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