आगरा। आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन-2026 के लिए प्रकाशित अंतिम निर्वाचक नामावली विवादों के घेरे में आ गई है। सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता धर्मेंद्र यादव ने निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। अधिकारियों और भूमाफिया की मिलीभगत से हजारों अपात्रों को मतदाता बनाने का आरोप लगाया गया है।
इस संबंध में राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने भी अधिकारियों को पत्राचार कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। धर्मेंद्र का दावा है कि प्रकाशित सूची में लगभग 2000 मतदाता ऐसे हैं, जिनके विद्यालय का नाम ही अंकित नहीं है। वहीं, 5000 से अधिक मतदाता आयु और सेवा शर्तों को पूरा नहीं करते। सूची में एएसएचएसएस, जीजीजीआईसी और केपीएचएसएस जैसे संक्षिप्त नामों वाले संदिग्ध विद्यालयों के नाम दर्ज हैं, जो प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत होते हैं।
आश्चर्यजनक रूप से सैकड़ों प्रकरणों में शिक्षण संस्थान के कॉलम में मतदाता का ही नाम लिख दिया गया है। कहा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जिला विद्यालय निरीक्षक आगरा ने प्रमाणपत्रों का गहन सत्यापन नहीं किया। आरोप लगाया कि गोरखपुर और अलीगढ़ के डीआईओएस ने पात्रता को लेकर विस्तृत विज्ञापन जारी किए लेकिन आगरा में इसका पालन नहीं हुआ। ऑनलाइन प्रक्रिया में जो आवेदन पहले रिजेक्ट हुए, वे बाद में उसी क्रमांक पर अप्रूव कर दिए गए।
धर्मेंद्र ने कहा कि निर्वाचन कार्य से जुड़े कर्मचारियों ने माफियाओं के साथ मिलकर पारदर्शी प्रक्रिया को प्रभावित किया है। दावे और आपत्तियों के लिए समय जानबूझकर कम दिया गया ताकि संदिग्ध मतदाताओं को चिह्नित न किया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हुई, जबकि नियमों के विपरीत बिना सत्यापन के हजारों अपात्रों के नाम अंतिम सूची में शामिल कर दिए गए। अब इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की जा रही है।