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बोर्ड के आंतरिक मूल्यांकन में मैनपुरी के कॉलेज फेल

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मैनपुरी। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शिक्षण को आसान बनाने और छात्रों की मेरिट को सुधारने के लिए बोर्ड परीक्षा में भी आंतरिक मूल्यांकन की शुरुआत की थी। लेकिन, मैनपुरी के कॉलेज इसमें पूरी तरह फेल हो गए। न तो आंतरिक मूल्यांकन के लिए कॉलेजों में तैयारी कराई जा रही है और न ही छात्रों को इसके बारे में कोई जानकारी है। ऐसे में कॉलेज मनमर्जी से आंतरिक परीक्षा में नंबर बांट रहे हैं।
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यूपी बोर्ड की तरफ से हाईस्कूल के परीक्षार्थियों की बौद्धिक क्षमता का विकास करने और मूल्यांकन में सुधार के लिए प्रयोगात्मक विषय के स्थान प्रोजेक्ट वर्क शुरू किया गया था। इसे आंतरिक मूल्यांकन का नाम इसलिए दिया गया क्योंकि इसमें विद्यालय के शिक्षक ही मूल्यांकन करते हैं। इसकी सूची बोर्ड को भेज दी जाती है। बाद में ये अंक मूल परीक्षा के साथ शामिल होते हैं।
इसके लिए प्रत्येक विषय की किताब में अलग से प्रोजेक्ट कार्य दिया गया है। जो छात्र-छात्राओं को बहुविकल्पीय व लघु प्रश्नों के उत्तरों को आसानी से याद कराने में मददगार हैं। लेकिन जिले के स्कूलों में प्रोजेक्ट वर्क की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा निजी विद्यालयों के शिक्षकों ने आज तक इसे पढ़ाया ही नहीं है और न ही कोई फाइल तैयार की है। ऐसे में कॉलेज केवल अपनी मनमर्जी से छात्रों को आंतरिक मूल्यांकन के अंक बांटता है।
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बोर्ड परीक्षा में जुड़ते हैं अंक
प्रोजेक्ट वर्क के लिए प्रत्येक विषय में अधिकतम 30 अंक निर्धारित हैं। ये 30 अंक लिखित परीक्षा के बाद तैयार होने वाले परिणाम में जोड़े जाते हैं। जो छात्र-छात्राओं की डिवीजन बनाने में सहायक हैं। प्रोजेक्ट कार्य न कराकर स्कूलों में छात्र-छात्राओं से 30 अंकों के लिए अवैध वसूली कर मनमाने अंक प्रदान किए जाते हैं।

इसलिए किया गया बदलाव
पूर्व में सीबीएसई बोर्ड में यह व्यवस्था थी। प्रतियोगी परीक्षाओं में यूपी बोर्ड के छात्र-छात्राएं मेरिट में पीछे रह जाते थे। इसीलिए यूपी बोर्ड को भी इस व्यवस्था को लागू करना पड़ा। नई व्यवस्था के तहत हाईस्कूल में 70 अंक की लिखित परीक्षा प्रत्येक विषय में रखी गई है, जबकि 30 अंक प्रोजेक्ट वर्क के होते हैं।

इतने इस प्रकार के कॉलेज
-473 हैं कुल माध्यमिक कॉलेज
-22 राजकीय माध्यमिक कॉलेज
-53 अशासकीय सहायता प्राप्त कॉलेज
-398 वित्तविहीन कॉलेज

सभी कॉलेजों के प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी है कि वे प्रोजेक्ट कार्य साथ-साथ ही कराते चलें। शीघ्र ही टीम गठित कर जांच कराई जाएगी। लापरवाही करने वाले विषय अध्यापकों और प्रधानाचार्यों पर कार्रवाई होगी। - सर्वेश कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक
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