आगरा। शस्त्र लाइसेंस से जुड़े तीन अलग-अलग मामले सामने आए हैं। इनमें एक आवेदक ने लाइसेंस के कार्यक्षेत्र विस्तार के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जिलाधिकारी कार्यालय में महीनों तक फाइल लंबित रहने के बाद यह कदम उठाया गया।
बाह के रजत शर्मा ने .32 बोर की रिवॉल्वर का लाइसेंस पूरे भारत के लिए वैध कराने के लिए आवेदन किया था। वर्तमान में उनका लाइसेंस केवल उत्तर प्रदेश के लिए वैध है। उनकी पत्रावली डीएम कार्यालय में अकारण लंबित रही और शासन को नहीं भेजी गई। 27 मार्च, 2025 को एक स्मरण पत्र भी दिया गया पर सुनवाई नहीं हुई। प्रशासनिक हीलाहवाली से परेशान होकर रजत शर्मा ने न्यायालय की शरण ली। हाईकोर्ट ने लंबित पत्रावली को फॉर्म संख्या 03 में दाखिल करने का आदेश दिया। 22 जुलाई, 2026 को आवेदक ने हाईकोर्ट के आदेश की प्रति के साथ जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र सौंपा। एडीएम सिटी यमुनाधर चौहान ने बताया कि ऑल इंडिया परमिट शासन से तय होगा। अदालत के आदेश का पालन कराया जाएगा।
बढ़ती उम्र के कारण लाइसेंस सरेंडर
जगदीशपुरा थाना क्षेत्र के कृष्णकांत शर्मा ने अपना शस्त्र लाइसेंस सरेंडर करने की अर्जी दी है। 67 वर्ष की आयु होने के कारण वह अपनी एसबीबीएल गन नहीं रखना चाहते। उनका लाइसेंस 31 दिसंबर, 2026 तक वैध है। उन्होंने बंदूक को मालखाने में जमा करने की अनुमति मांगी है। जिलाधिकारी ने इस मामले में एडीएम सिटी को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
नौकरी के लिए हथियार बदलने की गुहार
सदर बाजार थाना क्षेत्र के रामनिवास ने रोजगार की मजबूरी में हथियार बदलने की अनुमति मांगी है। सेना से रिटायर्ड हवलदार रामनिवास अपनी .315 बोर की राइफल बेचना चाहते हैं। वह 12 बोर की डीबीबीएल गन खरीदना चाहते हैं। उन्हें बैंक ऑफ बड़ौदा में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी से हटा दिया गया था। बैंक में 12 बोर की बंदूक अनिवार्य होने के कारण यह समस्या आई। जिलाधिकारी ने इस प्रकरण पर चर्चा कर निस्तारण कराने के लिए एडीएम सिटी को निर्देश दिए हैं।