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Monkey Pox: मथुरा में मंकी पॉक्स को लेकर अलर्ट, तैयार किया गया अलग वार्ड 

Sun, 12 Jun 2022 09:57 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

कोरोना की रफ्तार धीमी होने के साथ ही अब मंकी पॉक्स का डर सताने लगा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मामले सामने आने के बाद मथुरा में अलर्ट कर दिया गया है। 

 
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दुनियाभर में मंकीपॉक्स का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मथुरा में मंकी पॉक्स को लेकर अलर्ट कर दिया गया है। इसके लक्षण मिलने वाले मरीजों के लिए अलग वार्ड बना दिया गया है। इस बीमारी को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। दिल्ली क्षेत्र में मंकी पॉक्स के दो मामले मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग गंभीर है।

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जनपद में मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, नंदगांव, बरसाना आदि क्षेत्रों में बंदरों की संख्या अधिक है। बंदरों का आतंक इस कदर है कि आए दिन किसी न किसी को काट लेते हैं। हजारों की संख्या में मौजूद इन बंदरों की वजह से स्वास्थ्य विभाग खासी सतर्कता बरत रहा है, क्योंकि बंदर से भी वायरस फैलता है। यहां आने वाले पर्यटक भी इन बंदरों से प्रभावित रहते हैं। दिल्ली में इसके दो मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। इससे निपटने की सभी तैयारियां कर ली गई हैं।

चेचक की तरह होता है 

नोडल अधिकारी डॉ. भूदेव सिंह ने बताया कि मंकी पॉक्स एक वायरल इन्फेक्शन है। ये चेचक की तरह होता है। इसमें लक्षण भी वैसे ही दिखते हैं। यह बंदर और चूहों से इंसान में फैल सकता है। अगर कोई जानवर इस बीमारी से ग्रस्त है, तो और उसके संपर्क में आने वाले इंसान को भी मंकी पॉक्स होने की आशंका होती है। वायरस से व्यक्ति को पहले बुखार आता है, उसके बाद शरीर में चक्के पड़ जाते हैं। इसमें लिम्नफोड जैसे लक्षण मिलते हैं। मंकी पॉक्स वायरस दो से चार हफ्ते तक रहता है। 


संयुक्त जिला अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन समाप्त

मंकी पॉक्स का खतरा बढ़ रहा है तो मथुरा और वृंदावन के बड़े अस्पतालों में एंटी रैबीज इंजेक्शन खत्म हो गए हैं। इसके चलते आम मरीज अस्पताल से लौट रहे हैं। ऐसे में मरीजों को इन महंगे इंजेक्शन की बाजार से खरीद करनी पड़ रही है।

एंटी रैबीज इंजेक्शन के लिए हर रोज पहुंच रहे इतने मरीज 

जिला अस्पताल में हर दिन कई मरीज कुत्ता और बंदरों से काटने के बाद एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचते हैं। इसमें 40 प्रतिशत मरीज बंदरों से प्रभावित होते हैं, जबकि बाकी 60 प्रतिशत मरीज कुत्तों के काटने का शिकार होते हैं। बाजार में महंगी कीमत वाले ये इंजेक्शन जिला अस्पताल सहित ग्रामीण अंचलों के सरकारी अस्पतालों में निशुल्क लगाए जाते हैं।

कई दिन से नहीं वैक्सीन

पिछले कई दिन से वृंदावन के संयुक्त जिला अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन खत्म हो गए हैं। इससे इंजेक्शन के लिए यहां पहुंचने वाले मरीज निराश लौट रहे हैं। यहां लोगों को बाजार का रास्ता दिखाया जा रहा है। लोग तीन सौ रुपये में वैक्सीन खरीद रहे हैं। 

जल्द वैक्सीन आने की संभावना

संयुक्त जिला अस्पताल वृंदावन के  सीएमएस डॉ. एसके जैन ने बताया कि एंटी रैबीज वैक्सीन खत्म हो गई है। इसकी सूचना आपूर्ति करने वाली एजेंसी को दे दी गई है। जल्द वैक्सीन आने की संभावना है। इस स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

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