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Alert: दूध से एक फीसदी बच्चों में हो रही है आंतों की एलर्जी, कार्यशाला में डॉक्टरों ने बताए हालात; दी सलाह

Mon, 11 May 2026 03:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

बीमारी से पीड़ित बच्चों में करीब एक फीसदी में यह दिक्कत मिल रही है। एमजी रोड स्थित होटल में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) की कार्यशाला के अंतिम दिन डॉक्टरों ने बच्चों में बढ़ती एलर्जी-अस्थमा पर व्याख्यान दिए।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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भैंस, गाय, भेड़, बकरी के साथ ही डिब्बा बंद दूध से बच्चों की आंत में एलर्जी हो रही है। बीमारी से पीड़ित बच्चों में करीब एक फीसदी में यह दिक्कत मिल रही है। एमजी रोड स्थित होटल में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) की कार्यशाला के अंतिम दिन डॉक्टरों ने बच्चों में बढ़ती एलर्जी-अस्थमा पर व्याख्यान दिए।

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नई दिल्ली के डॉ. शरथ गोपालन ने बताया कि दूध में व्हे और कैसिइन प्रोटीन होता है। ये पशुओं और डिब्बा बंद दूध में पाया जाता है। ये आंत की पहली दो परतों को प्रभावित करता है। इसके कारण कुल एलर्जी के मरीजों में से एक फीसदी बच्चों में परेशानी बन रही है। अगर स्वस्थ बच्चे के मल के साथ रक्त आ रहा है। सांस फूलती है, बार-बार दस्त और रात में पेट में मरोड़ होती है। त्वचा पर चकत्ते-लाल दाने भी हैं तो इसकी जांच जरूर कराएं। 

उन्होंने कहा कि छह माह तक शिशुओं को स्तनपान ही कराया जाए। मुख्य अतिथि बंगलूरू के डॉ. एच. परमेश ने बताया कि अति स्वच्छ माहौल में रहने से भी बच्चों में एलर्जी हो रही है। कहा कि अभिभावक दो साल तक के बच्चों को धूप, मिट्टी समेत प्राकृतिक वातावरण के संपर्क से बचाते हैं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। ऐसे में जब बच्चों की आयु बढ़ने लगती है और मिट्टी, धूप समेत खुले प्राकृतिक वातावरण में पहुंचते हैं तो एलर्जी की समस्या होती है। 
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सबसे ज्यादा धूल-धुआं से बढ़ रही एलर्जी
आयोजन अध्यक्ष डॉ. आरएन द्विवेदी और सचिव डॉ. राहुल पैंगोरिया ने बताया कि 20-25 फीसदी बच्चों में एलर्जी-अस्थमा की परेशानी मिल रही है। इसमें सबसे ज्यादा बढ़ते प्रदूषण से परेशानी हो रही है। इसमें धूल-धुआं, निर्माण के वक्त अतिसूक्ष्म कण समेत अन्य वजहें हैं। इससे बच्चों को बार-बार छींक आना, नाक में खुजली, सांस फूलने, थकान समेत अन्य परेशानी होने लगती है। ऐसे में प्रदूषण फैलाने वालों पर सख्ती की जरूरत है। इसके लिए संस्था शासन को भी गाइडलाइन भेजेगी।

खास बातें

  • वाहनों की धुआं जांच पर सख्ती की जाए
  • निर्माण साइट पर धूल निस्तारण बेहतर ढंग से हो
  • प्रदूषित क्षेत्रों में जाने से पहले मास्क लगाएं
  • घर में हवा की निकासी की बेहतर व्यवस्था हो
  • पालतू पशु-पक्षियों को बेडरूम से दूर रखें
  • त्वचा, सांस और फूड
  • एलर्जी के लक्षण पर जांच कराएं

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