चेहल्लुम के अवसर पर न्यू आगरा स्थित मजार शहीद-ए-सालिस से शिया समुदाय ने अलम, ताबूत और जुलजनाह का जुलूस निकाला, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। मजलिस, नौहाख्वानी और मातम के जरिए कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और इमाम हुसैन की कुर्बानी व इंसानियत का संदेश याद किया गया।
आगरा में चेहल्लुम पर मंगलवार को न्यू आगरा स्थित मजार शहीद-ए-सालिस से शिया समुदाय की ओर से अलम, ताबूत और जुलजनाह का जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
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चेहल्लुम पर निकला अलम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जुलूस से पूर्व परिसर में मजलिस-ए-अजा का आयोजन हुआ, जिसमें मौलाना नजीब अब्बास जाफरी ने कर्बला की घटना का जिक्र करते हुए हजरत इमाम हुसैन और उनके परिवार की कुर्बानियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत इन्सानियत, सत्य और न्याय की रक्षा का संदेश देती है। मजलिस के बाद जुलूस मजार-ए-शहीद-ए-सालिस से शुरू होकर नूरी नासिरबाग और दयालबाग रोड के विभिन्न मार्गों से होते हुए मजार पर पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस के दौरान नौहाख्वानी कर कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
संचालक आदिल रिजवी ने बताया कि यह आयोजन दिवंगत साबिर हुसैन रिजवी के समय से निरंतर आयोजित किया जा रहा है। जुलूस में मिन्हाल आब्दी, साहिल रिजवी, मोहम्मद मिर्जा, सामिर जाफरी और इश्तियाक हुसैन ने नौहाख्वानी की। इस मौके पर दिलकश आब्दी, मीसम रिजवी, शाबू मिर्जा, अमन रिजवी, कामिल हुसैन नकवी, अनवर हुसैन, मौलाना नजर इमाम, मकसद इमाम, नवाब रिजवी आदि मौजूद रहे।