अक्षय तृतीया महत्व
- इसी तिथि को परशुराम व हयग्रीव का अवतार हुआ था।
- त्रेतायुग का प्रारंभ भी इसी तिथि को हुआ था।
- इस दिन श्री बद्रीनाथ जी के पट खुलते हैं।
- भगवान कृष्ण और सुदामा का मिलन हुआ था।
- महर्षि वेदव्यास ने महाभारत लिखना शुरू किया था।
- बांकेबिहारी के चरण दर्शन अक्षय तृतीया को होते हैं।
ठाकुरजी को चंदन का लेप के साथ लगेगा सत्तू का भोग
वैशाख के महीने में गर्मी अपने चरम की ओर तेजी के साथ बढ़ने लगी है। आम आदमी व्याकुल है। पशु पक्षी भी बेचैन हो गए हैं। ऐसे में ठाकुरजी का गर्मी से बचाव करने के लिए भक्तों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। खासकर अक्षय तृतीया के मद्देनजर मंदिरों में होने वाले आयोजनों के लिए बाजार में खरीदारी हो रही है। बड़ी मात्रा में चंदन, सत्तू खरीदे जा रहा है।
तीन मई की अक्षय तृतीया है। इस दिन विभिन्न आयोजन मंदिरों में किए जाते हैं। इन आयोजनों के अनुसार चंदन, सत्तू, पंखा, सुराही, कुंजा, शर्बत आदि की बाजार में बिक्री हो रही है। लोग अपने घर पर मंदिरों के लिए गर्मी को देखते हुए ठाकुरजी की सेवा के लिए अनेक सामान खरीद रहे हैं। खासकर चंदन और सत्तू की खरीद की जा रही है। ठाकुरजी को चंदन का लेप के साथ सत्तू का भोग लगेगा।
अक्षय तृतीया पर चमकेगा सोना
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया पर सोना-चांदी की खरीद शुभ मानी जाती है। ज्योतिषाचार्य भी इस दिन सोने-चांदी सहित घर जमीन की खरीद की सलाह देते हैं। ऐसे में सराफा बाजार में इस बार सोने-चांदी के बाजार में चमक आने की प्रबल संभावना है। इसके लिए सराफा बाजार में तैयारी भी कर ली है।
सराफा कारोबारी पीयूष गोयल का कहना है कि कोविड के चलते पिछले तीन सालों से अक्षय तृतीया पर बाजार बहुत हल्का रहा है। इस बार बाजार में बड़ी खरीदारी की उम्मीद है। वरुण गर्ग का कहना है धार्मिक और प्राचीन मान्यताओं के तहत लोग बड़ी मात्रा में इस दिन आभूषण खरीदते हैं। बाजार में इस बार अच्छी खरीदारी की उम्मीद है।