करहल से पूरब व पश्चिम की उन 100 सीटों पर सपा की नजर है, जहां पिछले चुनाव में वह दूसरे व तीसरे स्थान पर थी। तीसरे चरण में करहल में चुनाव है। जबकि गोरखपुर में चुनाव छठवें चरण में होगा। पार्टी सूत्रों का मानना है कि करहल से उतरकर अखिलेश को अंतिम चरण में होने वाले पूर्वांचल के जिलों की सीटों पर चुनाव में पार्टी को बढ़ाने के लिए अधिक समय मिलेगा।
काशी में मोदी व गोरखपुर में योगी
भाजपा के लिए सियासी मायनों में पूर्वांचल अहम है। काशी से पीएम मोदी सांसद हैं। गोरखुपर से इस बार सीएम योगी चुनाव मैदान में होंगे। दोनों का प्रभाव पूर्वांचल की सीटों पर पड़ेगा। जिसकी काट के लिए अखिलेश ने मैनपुरी की करहल सीट को चुना है। यहां से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा पूर्वी जिलों की सीटों पर भी असर हो सकता है।
'एमवाई' फैक्ट की भूमिका
अखिलेश के मैदान में उतरने से पूरब व पश्चिम में एमवाई (मुस्लिम-यादव) फैक्टर मजबूत होगा। जाटों में रालोद की पकड़ मजबूत करेगी। ऐसे में आगरा, मेरठ व अलीगढ़ मंडल सीटों के अलावा सहारनपुर, बुलंदशहर की सीटों पर गठबंधन मजबूत हो सकता है। पूरब में बदायूं, बरेली, लखीमपुर और आजमगढ़, मिर्जापुर मंडल की सीटों पर सपा सामाजिक न्याय के नारे के सहारे चुनावी समर में होगी। करहल से पूरब व पश्चिमी उत्तर प्रदेश की करीब 100 सीटों पर सपा ने सियासी बिसात बिछाई है।