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Vrindavan: अकबर ने भी किए थे ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन, स्वामी हरिदास को दान में दी थी 25 बीघा जमीन

Wed, 21 Sep 2022 03:56 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, वृंदावन (मथुरा)

सार

ठाकुर बांकेबिहारीजी महाराज के दर्शन पाकर मुगल सम्राट अकबर में सर्वधर्म समभाव की भावना जागृति हुई थी। अकबर ने 1573 में ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के दर्शन किए। उस समय ठाकुरजी निधिवन में विराजमान थे।
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बांकेबिहारी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वृंदावन में जन-जन के आराध्य ठाकुर बांकेबिहारीजी महाराज अति विशिष्टजनों को आकर्षित करते रहे हैं। मुगल सम्राट अकबर से लेकर निवर्तमान राष्ट्रपति तक बिहारीजी के दर्शन के लिए वृंदावन की पावन धरा पर आए चुके हैं। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत एवं इतिहासकार आचार्य प्रहलादवल्लभ गोस्वामी ने बताया कि 1543 ईसवी में हरिदासजी की संगीत साधना से प्रगट हुए बांकेबिहारीजी के दर्शनार्थ उच्चकोटि के भक्त, संत- महंत, राजा- महाराजा आते रहे हैं। 

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मुख्यतौर पर 1573 में मुग़ल बादशाह अकबर ने ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के दर्शन किए। उस समय ठाकुरजी निधिवन में विराजित थे। अकबर वेष बदलकर तानसेन के साथ वृंदावन आये। अकबर ने वहीं हरिदासजी से भेंट की और ठाकुर बांके बिहारीजी के दर्शन किए थे। वर्ष 1870 में अंग्रेज कलक्टर ग्राऊस, आजादी पूर्व अनेक महान क्रांतिकारी यहां आए थे। 

ये हस्तियां भी कर चुकी हैं दर्शन 

वर्ष 1957 में स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, राजा महेंद्र प्रताप, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. सम्पूर्णानंद, डॉ. परिपूर्णानन्द, वर्ष 1985 में उप राष्ट्रपति डॉ. रामास्वामी वेंकटरमण, 1989 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बीरबहादुर सिंह, 1990 में रामानंद सागर परिवार, कर्नाटक के मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े, 1991 में उप राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा, नेता विपक्ष अटल बिहारी बाजपेई, कांग्रेस अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी, राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, 27 जून 2022 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ठाकुर बांकेबिहारीजी महाराज के दर्शन कर चुके हैं।

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स्वामी हरिदासजी को अकबर ने समर्पित की थी 25 बीघा जमीन

1598 में मुग़ल सम्राट अकबर द्वारा संगीत सम्राट स्वामी हरिदासजी को 25 बीघा भूमि समर्पित की थी। 1573 ईस्वी में बृज यात्रा पर अकबर यहां के संतों से मिलकर अभिभूत हो उठे थे। यहीं से उनके उनके ह्रदय में सर्व धर्म समभाव की भावना उदित हुई, जो दीन-ए-इलाही मत की प्रतिपादक स्वरूप में विश्वप्रसिद्ध हुई। 

लेखक इरफ़ान हबीब और तड़फड़ा मुखर्जी की पुस्तक बृज भूमि इन मुग़ल टाइम्स के अनुसार वर्ष 1598 में जारी हुए शहंशाह अकबर के फरमान में स्वामी हरिदास को मथुरा परगना के वृंदावन कस्बे में मोहल्ला दोसेसिच (दुसायत / नगलानागु) और अरिथ (राधाकुंड) में 25 बीघा जमीन दान दी गई। इस बात का उल्लेख एफएस ग्राऊस की पुस्तक मथुरा ए डिस्ट्रिक्ट मेमोयर और गोपाल नारायण बोहरा के ग्रन्थ टेस्ट एंड ट्रांसलेशन में भी किया गया है। राधाकुंड संगमस्थल पर बिहारीजी का मंदिर उसी भूखंड के एक हिस्से में बना है। 
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