स्वामी हरिदासजी को अकबर ने समर्पित की थी 25 बीघा जमीन
1598 में मुग़ल सम्राट अकबर द्वारा संगीत सम्राट स्वामी हरिदासजी को 25 बीघा भूमि समर्पित की थी। 1573 ईस्वी में बृज यात्रा पर अकबर यहां के संतों से मिलकर अभिभूत हो उठे थे। यहीं से उनके उनके ह्रदय में सर्व धर्म समभाव की भावना उदित हुई, जो दीन-ए-इलाही मत की प्रतिपादक स्वरूप में विश्वप्रसिद्ध हुई।
लेखक इरफ़ान हबीब और तड़फड़ा मुखर्जी की पुस्तक बृज भूमि इन मुग़ल टाइम्स के अनुसार वर्ष 1598 में जारी हुए शहंशाह अकबर के फरमान में स्वामी हरिदास को मथुरा परगना के वृंदावन कस्बे में मोहल्ला दोसेसिच (दुसायत / नगलानागु) और अरिथ (राधाकुंड) में 25 बीघा जमीन दान दी गई। इस बात का उल्लेख एफएस ग्राऊस की पुस्तक मथुरा ए डिस्ट्रिक्ट मेमोयर और गोपाल नारायण बोहरा के ग्रन्थ टेस्ट एंड ट्रांसलेशन में भी किया गया है। राधाकुंड संगमस्थल पर बिहारीजी का मंदिर उसी भूखंड के एक हिस्से में बना है।