इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए राजनेताओं ने पैरवी तो बेहद लचर की, लेकिन एयरपोर्ट सलाहकार समिति बनवाने में देरी नहीं की। खेरिया एयरपोर्ट के लिए 14 साल बाद सलाहकार समिति अस्तित्व में आई है, जिसमें केेंद्रीय मंत्री डा. रामशंकर कठेरिया भी सदस्य हैं। यह और बात है कि गठन के बाद इस समिति की बैठक अब तक नहीं हुई और सलाह भी नहीं दी जा सकी।
देश के सबसे खराब एयरपोर्ट में शुमार आगरा के सिविल एयरपोर्ट के विकास के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सलाहकार समिति बनाई है। 6 सदस्यीय कमेटी में केंद्रीय मंत्री डा. रामशंकर कठेरिया, एफमेक अध्यक्ष पूरन डावर, विधायक गुटियारी लाल दुवेश, भाजपा नेता राज कुमार चाहर, आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चेंबर अध्यक्ष प्रह्लाद अग्रवाल और मार्बल कारोबारी सतीश गुप्ता शामिल हैं। यह समिति एयरपोर्ट में यात्रियों की सुविधाओं के लिए अपनी सलाह देगी, लेकिन गठन के बाद से अब तक समिति ने कोई बैठक ही नहीं की, न ही कोई सलाह ही दे पाई।
‘इंटरनेशनल एयरपोर्ट का मुद्दा राजनैतिक झगड़े में फंस गया है। अगर सिविल टर्मिनल ही मिल जाए तो आगरा को फायदा उसी से हो जाएगा। 40 किमी दायरे में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन जाए तो फायदा होगा, उससे पहले इसी खेरिया एयरपोर्ट पर अलग एन्कलेव या अलग रास्ता दे दिया जाए। ये आगरा का हक है’
सतीश गुप्ता, सदस्य, एयरपोर्ट सलाहकार समिति
‘हर फोरम पर हम लोगों की आवाज पहुंचा रहे हैं, लेकिन फैसला लेने वाली तो सत्ता है। इन पर दवाब बने या तो यह जन आंदोलन का रूप ले। खेरिया से हटकर एयरपोर्ट बने तो आगरा को फायदा होगा, भले ही छोटा बन जाए’
के सी जैन, सचिव, एडीएफ
एयरपोर्ट की मांग करने वाली ये संस्थाएं
- टूरिज्म गिल्ड आफ आगरा
- आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन
- आगरा टूरिज्म डेवलपमेंट फाउंडेशन
- फेडरेशन आफ ट्रेवल एसोसिएशन
- नेशनल चैंबर आफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स
- होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन
- होटल एंड रेस्टोरेंट ऑनर्स एसोसिएशन
- आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चेंबर
- एप्रूव्ड गाइड एसोसिएशन
- एसोसिएटेड चेंबर आफ कॉमर्स
फोटो खिंचवाने तक सीमित हैं संस्थाएं
मसला इंटरनेशनल एयरपोर्ट का हो या पर्यटन से जुड़े किसी मुद्दे का, पर्यटन संस्थाओं की भूमिका अब तक केवल फोटो खिंचवाने तक ही सीमित रही है। पर्यटन के नाम पर शहर में एक दर्जन संस्थाएं हैं, लेकिन सांसद या मंत्रियों के साथ दिल्ली और लखनऊ जाकर केवल ज्ञापन सौंपने तक ही सीमित हैं। केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद हर सप्ताह इन संस्थाओं के प्रतिनिधिमंडल के नाम पर दो-तीन लोग दिल्ली में मंत्रियों के साथ फोटो खिंचवाकर फेसबुक और सोशल मीडिया पर पोस्ट करते रहे। वहीं, पर्यटन संस्थाओं के बीच आपस में ही खींचतान है। ताज की टिकट से लेकर एयरपोर्ट तक के मुद्दे पर पर्यटन संस्थाएं ट्रेड के चुनिंदा लोगों के हाथों में खिलौना बनती रही हैं। किसी भी मुद्दे को परिणाम तक पहुंचाने की जगह संस्थाओं में शामिल लोग निजी फायदे के लिए मुद्दों को किनारे करते रहे हैं।