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Pollution in Agra: तापमान में गिरावट के साथ ही हवा की गुणवत्ता हुई खराब, ताजमहल के पास बढ़ा प्रदूषण

Mon, 05 Dec 2022 12:38 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

ताजनगरी में तापमान की गिरावट के साथ प्रदूषण बढ़ गया है। हवा में धूल और धुआं के सूक्ष्म कण बढ़ गए हैं। आगामी सप्ताह में कोहरा छाएगा। स्मॉग की समस्या बढ़ेगी।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तापमान में गिरावट के साथ ही हवा की गुणवत्ता खराब हो रही है। खासकर मुख्य बाजारों के पास। रविवार को संजय प्लेस में एक्यूआई सबसे ज्यादा 270 रहा। आवास विकास कॉलोनी में सबसे कम 75 एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) दर्ज किया गया। शास्त्रीपुरम में कई स्थानों पर पाइपलाइन की खुदाई के कारण धूल उड़ने से प्रदूषण बढ़ रहा है। हवा में धूल और धुआं के सूक्ष्म कण बढ़ गए हैं। आगामी सप्ताह में कोहरा छाएगा। स्मॉग की समस्या बढ़ेगी। 

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शहर में निर्माण कार्योँ के कारण उड़ने वाली धूल हो या फिर 15 साल पुराने वाहनों का संचालन, किसी पर रोक नहीं लग सकी है। शास्त्रीपुरम में सड़कें खुदी पड़ी हैं। ऐसे में प्रदूषण बढ़ रहा है। रविवार को रोहता में एक्यूआई 120, शास्त्रीपुरम में 135 दर्ज किया गया। ताजमहल के पास शाहजहां गार्डन में भी 109 एक्यूआई रहा। सुबह स्मॉग छाया रहा। हवा में सूक्ष्म कणों की मात्रा अधिक होने से सांस रोगियों की परेशानी बढ़ने लगी है। 

संजय प्लेस में प्रदूषण

प्रदूषक तत्व          न्यूनतम  औसत       अधिकतम 
पीएम-2.5           93       270.0      332.0
पीएम-10            101.0   190.0      315.0
एनओ-2            35.0        90.0     194.0
एसओ-2            10.0       9.0        19.0
सीओ-2             42         171        171
ओजोन               38          53         68     

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प्रदूषण से फेफड़े ही नहीं दिल भी होता है बीमार

प्रदूषण की वजह से व्यक्ति के फेफड़े ही नहीं दिल भी बीमार हो रहा है। प्रदूषण के तत्व फेफड़ों के जरिए दिल तक पहुंच रहे हैं और नुकसान पहुंचा रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के क्षय व वक्ष रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जीवी सिंह का कहना है कि यह अध्ययन सामने आया है कि प्रदूषण से हृदय और हृदय तंत्र से संबंधित बीमारियां भी हो रही हैं।

प्रदूषण की वजह से गंभीर सांस रोगियों की संख्या बढ़ रही है। उन्हें भर्ती तक करना पड़ता है। अध्ययन में सामने आया है कि धूम्रपान न करने वाले लोगों के भी फेफड़े प्रभावित हो रहे हैं, मुख्य वजह प्रदूषण ही है। चाहे वह इंडोर हो या आउटडोर। डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि प्रदूषण अधिक होने पर ग्राउंड लेवल ओजोन बढ़ जाती है। लंबे समय तक इस वातावरण में रहने वाले बच्चों में अस्थमा होने का खतरा बढ़ जाता है। प्रदूषण की वजह से अस्थमा और टीबी के मरीजों की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रदूषण शरीर के सभी हिस्सों को प्रभावित करता है। फेफड़े के कैंसर की बड़ी वजह प्रदूषण ही है।
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