लॉकडाउन के शुरुआती 21 दिनों में हुए प्रकृति को जो ऑक्सीजन मिली वह लॉकडाउन 3.0 के शुरू होने के बाद से ही प्रभावित होने लगी है। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के साथ वायु-गुणवत्ता सूचकांक भी तीन गुना रफ्तार से बढ़ा है। लॉकडाउन के शुरूआती दौर में 52 पर आया वायु गुणवत्ता सूचकांक 130 पर आ पहुंचा है। जो स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक स्तर पर आ पहुंचा है।
लॉकडाउन 4.0 के समाप्त होने के पास ही यातायात का दवाब और बढ़ने की उम्मीद है, जिससे वायु प्रदूषण गुणवत्ता सूचकांक के ओर भी खतरनाक स्तर पर पहुंचने की संभावना बनी है। वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर अस्थमा, एलर्जी मरीजों के साथ सामान्य नागरिकों की भी परेशानी का सबब बना है।
लॉकडाउन का असर: साफ हुई हवा...खिल उठा ताजमहल, स्वच्छ हुआ यमुना का जल
जनपद में कोरोना काल से पूर्व सामान्य दिनों में वायु प्रदूषण गुणवत्ता सूचकांक 150 से 200 तक रहता है। आमतौर पर 50 तक ही वायु प्रदूषण गुणवत्ता सूचकांक शुद्घ वायु का सूचक होता है। 50 से ऊपर का सूचकांक चिंताजनक व प्रदूषण का स्तर 200 पार करने पर खतरनाक हालात में पहुंच जाता है।