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फूल रहा दम: धूल-धुआं से नाक-कान में खुजली, सांस लेने में हो रही दिक्कत; इन बातों का रखें ध्यान

Sun, 04 Oct 2026 03:38 PM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों को देर रात और सुबह तक रहती है।  अस्थमा-सांस रोग के पुराने मरीजों के सीने में भारीपन, जकड़न हो रही है। धूप निकलने के बाद परेशानी में सुधार होने लगता है। 
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सांस फूलना - फोटो : AI
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विस्तार
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हवा में बढ़ते धूल-कार्बन तत्वों से अस्थमा और सांस रोगियों की परेशानी बढ़ा दी है। ऐसे मरीजों की हालत ज्यादा खराब मिल रही है, जिन्होंने दवाएं बंद कर दी हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में ऐसे 15 फीसदी मरीज बढ़ गए हैं।
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वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि बढ़ता प्रदूषण के कारण हवा में कार्बन तत्वों की संख्या अधिक है। इसके संपर्क में आने पर नाक में खुजली, बार-बार छींक आने, गले में खराश, खांसी, जुकाम की परेशानी हो रही है। अब ओपीडी में रोजाना 400 से अधिक मरीज आ रहे हैं। अस्थमा-सांस रोग के पुराने मरीजों के सीने में भारीपन, जकड़न हो रही है।

सांस लेने में दिक्कत होने पर मरीज दिखाने आ रहे हैं। इनमें कई की हालत खराब मिलने पर भर्ती कर ऑक्सीजन दे रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों को देर रात और सुबह तक रहती है। धूप निकलने के बाद परेशानी में सुधार होने लगता है। मेडिसिन विभाग के डॉ. राजकुमार गुप्ता ने बताया कि वायरल फीवर ठीक होने के बाद भी खांसी लंबे समय तक परेशान कर रही है। थकान के साथ सिर-मांसपेशियों में हल्का दर्द हो रहा है। ऐसे मरीजों को दवा देने के साथ बचाव के बारे में भी बता रहे हैं।
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एलर्जी की बुधवार को विशेष ओपीडी
एसएन की ईएनटी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रीतू गुप्ता ने बताया कि बार-बार छींक आने, गले में खराश ठीक नहीं होने पर एलर्जी की परेशानी हो सकती है। ऐसे में ईएनटी रोग विभाग में हर बुधवार को एलर्जी की विशेष ओपीडी संचालित हो रही है। इसमें मरीज इलाज करा सकते हैं।
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चिकित्सकों ने दी ये सलाह
- अस्थमा-सांस रोगी डॉक्टर से दवाएं समायोजित कराएं।
- धूल-धुआं वाले क्षेत्रों में जाने पर मास्क लगाएं।
- सुबह-शाम भाप लें, गुनगुने पानी से गरारे करें।
- बुखार होने पर पैरासिटामॉल लें, ठीक न होने पर डॉक्टर को दिखाएं।


 
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