फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Agra Pollution: ताजनगरी में फिर बढ़ रहा प्रदूषण, इन इलाकों में हवा ज्यादा खतरनाक

Tue, 01 Dec 2020 11:44 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • शहर में जगह-जगह हो रही खोदाई के कारण पीएम-10 कण 9 गुना तक ज्यादा हुए 
  • राजेश्वर मंदिर, बसई, आईएसबीटी पर हवा ज्यादा खतरनाक, एक्यूआई 270 पर पहुंचा 
विज्ञापन
धुंध में छिपा ताजमहल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आगरा की हवा फिर से जहरीली हो रही है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के चलते मैदानी इलाकों में चली हवा के कारण प्रदूषण में एकाएक कमी आई, लेकिन रविवार के बाद सोमवार को प्रदूषण स्तर बढ़ा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक ताजनगरी का वायु प्रदूषण सूचकांक सोमवार को 270 हो गया। 

विज्ञापन


रविवार को एक्यूआई 244 पर था। शहर में अलग-अलग जगहों पर खोदाई और ट्रैफिक जाम के कारण प्रदूषण स्तर अलग-अलग रहा। आईएसबीटी, ईदगाह, राजेश्वर मंदिर और बसई तिराहे पर सबसे ज्यादा प्रदूषण और धूल कण पाए गए। सामान्य से 9 गुना ज्यादा पार्टिकुलेट मैटर-10 माइक्रोग्राम पाया गया।


ईदगाह में पुरानी बसों के कारण हवा में प्रदूषण ज्यादा है तो आईएसबीटी पर ओवरब्रिज के कारण और वाहनों के आवागमन के कारण धूल उड़ रही है। बसई तिराहे पर सीवर और पानी की लाइनों की खोदाई और अब मेट्रो द्वारा शुरू किए गए कार्य के साथ ट्रैफिक जाम प्रदूषण की बड़ी वजह है। इसी तरह शमशान घाट चौराहे पर भी प्रदूषण स्तर बढ़ रहा है। यहां पीएम-10 कणों की मात्रा सामान्य से 5 गुना ज्यादा 474 दर्ज की गई। 

विज्ञापन

इन क्षेत्रों में हवा खराब

स्थान                    एक्यूआई    पीएम-10
बसई तिराहा            435         708
राजेश्वर मंदिर           417         786
आईएसबीटी            426        874
ईदगाह                    434       620
तहसील चौराहा         389       522
अर्जुन नगर               358       654

संकट : नवंबर में एक दिन भी सांस लेने लायक नहीं रही हवा

नवंबर में एक भी दिन शहर की हवा सांस लेने लायक नहीं रही। सूक्ष्म कणों पीएम-2.5 की मात्रा 10 गुनी तक रही। पहले और तीसरे सप्ताह में प्रदूषण स्तर बेहद खतरनाक स्तर पर रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में 4 दिन हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में, 13 दिन बेहद खराब श्रेणी में और 9 दिन खराब श्रेणी में रही।
विज्ञापन

इस तरह 26 दिन तक हवा में जहर खतरनाक स्तर तक घुला रहा। केवल 4 दिन हवा की गुणवत्ता औसत रही, हालांकि सांस लेने लायक फिर भी नहीं रही। 2019 में शहर में न सीवर-पानी की लाइनों की खोदाई ज्यादा थी और न ही सड़क पर जाम था। ऐसे में हवा की गुणवत्ता पूरे महीने ठीक रही थी। 

सलाह : एयर एक्शन प्लान पर काम होना चाहिए 

पर्यावरणविद् चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि प्रशासन ने एयर एक्शन प्लान बनाया है, लेकिन इसका पालन कोई विभाग नहीं कर रहा। शहर में न खोदाई रुक रही और न ही कूड़ा जलना। प्रदूषण के स्तर की निगरानी रिटायर्ड जज से कराई जाए, तब हवा सुधरेगी, क्योंकि महकमों में डर पैदा होगा। 

सवाल : धूल नियंत्रण के उपाय नहीं

पर्यावरण एक्टिविस्ट डॉ. शरद गुप्ता ने कहा कि शहर में खोदाई के बाद धूल नियंत्रण के उपाय तो कोई विभाग नहीं कर रहा। टीटीजेड के अधिकारी कागजों पर ही काम कर रहे हैं। शहर के लोगों के स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं है। बिन मांगे दी गई करोड़ों की योजनाओं पर अधिकारी फोकस कर रहे हैं। एनजीटी में आगरा की खराब हवा के लिए याचिका दायर करुंगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें